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चिंताजनक: निकोटीन का जेनेटिक प्रहार, पिता तंबाकू का लती तो संतानों को डायबिटीज का खतरा अधिक

Mon, 16 Mar 2026 05:32 AM IST
Devesh Tripathi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली/वॉशिंगटन

सार

विशेषज्ञों के मुताबिक, लिवर फंक्शन में यह बदलाव भविष्य में फैटी लिवर जैसी गंभीर समस्याओं का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। वैज्ञानिकों ने परीक्षण के दौरान वैज्ञानिकों ने चूहों को केवल शुद्ध निकोटीन दिया था।
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डायबिटीज - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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पुरुषों की तंबाकू की लत उनके बच्चों में मधुमेह (डायबिटीज) के जोखिम को काफी हद तक बढ़ा सकती है। इतना ही नहीं, यह अगली पीढ़ी में शरीर में शुगर (चीनी) को प्रोसेस करने के तरीके को बदल सकता है।
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कैलिफोर्निया विवि, सांता क्रूज के वैज्ञानिकों ने चूहों पर किए अध्ययन में पाया कि जब नर चूहों को उनके पीने के पानी में निकोटीन दिया गया, तो उनकी संतान के मेटाबॉलिज्म (चयापचय) में स्पष्ट बदलाव दिखा। शोध की वरिष्ठ लेखिका डॉ. रकेल चमोरो-गार्शिया ने कहा कि जब नर चूहों ने निकोटीन का इस्तेमाल किया, तो उनकी संतानों में इंसुलिन और ग्लूकोज के स्तर में अंतर पाया गया। यह दिखाता है कि पुरुषों के तंबाकू का उपयोग उनके वंशजों में मधुमेह के खतरे से जुड़ा हुआ है। यह अध्ययन जर्नल ऑफ द एंडोक्राइन सोसाइटी में प्रकाशित हुआ है।

गर्भाधान से पहले पिता के स्वास्थ्य की जांच भी अहम
डॉ. चमोरो-गार्शिया के अनुसार, परिणाम बताते हैं कि पिता का निकोटीन सेवन बच्चों में पुरानी बीमारियों की संभावना बढ़ाता है। इससे स्पष्ट होता है कि गर्भाधान से पूर्व देखभाल में केवल मां ही नहीं, बल्कि पिता के स्वास्थ्य को भी शामिल करना अनिवार्य है। उनकी नियमित स्वास्थ्य जांच भी आने वाली पीढ़ी को इस जोखिम से बचा सकती है।
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बेटे और बेटियों पर अलग प्रभाव
अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने निकोटीन के संपर्क में आए पिता की संतानों की तुलना एक नियंत्रण समूह से की। निष्कर्षों में पाया गया कि निकोटीन प्रभावित पिताओं की महिला संतानों (बेटियों) में इंसुलिन और फास्टिंग ग्लूकोज का स्तर सामान्य से कम पाया गया। वहीं, पुरुष संतानों (पुत्र) के ब्लड ग्लूकोज के स्तर में कमी देखी गई और उनके लिवर फंक्शन (यकृत कार्यप्रणाली) में भी बदलाव पाए गए।

ई-सिगरेट भी अगली पीढ़ी के लिए हानिकारक
विशेषज्ञों के मुताबिक, लिवर फंक्शन में यह बदलाव भविष्य में फैटी लिवर जैसी गंभीर समस्याओं का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। वैज्ञानिकों ने परीक्षण के दौरान वैज्ञानिकों ने चूहों को केवल शुद्ध निकोटीन दिया था। इससे यह स्पष्ट हो गया कि बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाला यह नकारात्मक प्रभाव सिगरेट के अन्य रसायनों के कारण नहीं, बल्कि सीधे तौर पर निकोटीन की वजह से है। इसका अर्थ हुआ कि ई-सिगरेट और वेपिंग, जिन्हें अकसर कम हानिकारक माना जाता है, वे भी अगली पीढ़ी के लिए उतनी ही हानिकारक हैं।
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