अमेरिका और कनाडा के भारतीय दूतावास में हुए हमलों की जांच अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी करेगी। मार्च में खालिस्तान समर्थकों ने दोनों देशों के भारतीय मिशनों पर हमले किए थे। इसके अलावा, इंग्लैंड स्थित भारतीय उच्चायोग में हुए हिंसक प्रदर्शन और तोड़फोड़ के प्रयास किए गए थे, जिसकी जांच भी एनआईए कर रही है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने मार्च में हुए हमलों के संबंध में गैर कानूनी गतिविधि अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की थी।
भारत ने किया था कड़ा विरोध
खालिस्तान समर्थकों ने अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को स्थित भारतीय मिशनों पर हमला किया था। उन्होंने वहां खालिस्तान समर्थक नारे भी लगाए थे। प्रदर्शनकारियों ने शहर में लगाए गए अस्थाई सुरक्षा अवरोधकों को भी तोड़ दिया था। प्रदर्शनकारियों ने दूतावास के अंदर दो खालिस्तानी झंडे भी लगाए थे। हालांकि, बाद में उसे हटा दिया गया था। भारत ने घटना का कड़ा विरोध किया था। इसके अलावा भारत ने कनाडा के भारतीय राजदूतों पर हुए हमलों के बारे में भी जानकारी मांगी थी।
खालिस्तानियों ने झंडे भी उतारे
एनआईए ने 12 जून को एक सीसीटीवी फुटेज जारी की थी, जिसमें लंदन स्थित भारतीय दूतावास पर हमले हो रहे थे। इसके साथ ही एनआईए ने आरोपियों के जल्द गिरफ्तारी की मांग की थी। खालिस्तान समर्थकों ने 19 मार्च को प्रदर्शन के दौरान लंदन स्थित दूतावास से तिरंगा भी उतार दिया था। मिशन के अधिकारियों का कहना है कि हमले को विफल कर दिया गया है। तिरंगा भव्यता से आकाश में लहरा रहा है। इसके एक दिन पहले भारत ने अमृतपाल सिंह के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी।
ब्रिटिश सरकार की उदासीनता अस्वीकार्य
हिंसक प्रदर्शन के बाद मेट पुलिस ने कहा था कि दो सुरक्षाकर्मियों को मामूली चोट आई है। भारत ने ब्रिटिश उप उच्चायुक्त को तलब किया था और सुरक्षा की कमी पर जवाब मांगा था। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इसपर कहा था कि भारतीय राजदूत पर हमले और कर्मचारियों की सुरक्षा में ब्रिटिश सरकार की उदासीनता अस्वीकार्य है।