केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि आतंकवाद से जुड़े मामलों की तेज सुनवाई के लिए हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की एक समर्पित अदालत बनाई जाएगी। जहां 10 से ज्यादा एनआईए केस हैं, वहां एक से अधिक अदालतें होंगी। केंद्र ने यह जानकारी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान दी।
दिल्ली में 16 विशेष अदालतें
दिल्ली सरकार ने भी कोर्ट को बताया कि राजधानी में संगठित अपराध और आतंकवाद से जुड़े मामलों के लिए 16 विशेष अदालतें बनाई जा रही हैं। ये अदालतें करीब तीन महीने में काम शुरू कर देंगी।
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एनसीआर के लिए सख्त कानून पर विचार
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने केंद्र और दिल्ली सरकार से कहा कि एनसीआर (दिल्ली-एनसीआर) में अलग-अलग राज्यों के बीच अधिकार क्षेत्र की उलझन से अपराधी फायदा उठा लेते हैं। इसलिए मकोका जैसे सख्त संगठित अपराध कानून को पूरे एनसीआर में लागू करने की संभावना पर विचार किया जाए।
NIA को जांच अपने हाथ में लेने की शक्ति
न्यायमूर्ति बागची ने सुझाव दिया कि जहां अलग-अलग राज्यों में एक ही आरोपी के खिलाफ कई एफआईआर हों, वहां राष्ट्रीय जांच एजेंसी अपने कानून के तहत पूरी जांच अपने हाथ में ले सकती है, ताकि मामला तेजी से आगे बढ़े।
अदालतों के लिए अलग बजट और ढांचा
इस दौरान केंद्र ने बताया कि राज्यों के साथ बैठक के बाद तय हुआ है कि नया ढांचा, नए जज और स्टाफ नियुक्त किए जाएंगे। हर नई एनआईए अदालत के लिए करीब 1 करोड़ रुपये (बार-बार और एकमुश्त खर्च) का प्रस्ताव है। केरल जैसे राज्यों में, जहां प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े अधिक मामले हैं, एक से ज्य दा एनआईए अदालतें होंगी।
सिर्फ विशेष मामलों की रोजाना सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि ये समर्पित अदालतें सिर्फ एनआईए और विशेष क़ानूनों के मामलों की दिन-प्रतिदिन सुनवाई करेंगी। इन्हें सामान्य मामलों से बोझिल नहीं किया जाएगा।
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जनवरी 2026 में अगली सुनवाई
कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार से की गई कार्रवाई की रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई जनवरी 2026 में होगी। कोर्ट ने पहले भी जोर दिया था कि पुराने कोर्ट को विशेष घोषित करने के बजाय नई अदालतें बनाई जाएं, ताकि आम मामलों, जैसे विचाराधीन कैदी, बुज़ुर्ग, वंचित वर्ग और पारिवारिक विवाद, में देरी न हो।