राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने जम्मू-कश्मीर में सीमा पार आतंकी साजिश के मामले में शनिवार को दस जगहों पर छापेमारी की है। श्रीनगर, कुपवाड़ा, अनंतनाग, पुलवामा और बडगाम में मारे गए छापे, एनआईए की उस जांच का हिस्सा हैं, जिसके तहत घाटी में छिपे पाकिस्तान के आतंकियों को सीमा पार से कई तरह की मदद पहुंचाई जाती है। एनआईए के रडार पर केवल पाकिस्तान में बैठे हैंडलर ही नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर आतंकियों की मदद कर रहे 'ओवर ग्राउंड वर्कर' का नेटवर्क भी शामिल है।
यह मामला जकूरा पुलिस स्टेशन, श्रीनगर की FIR नंबर 0024/2026 से जुड़ा है। बाद में एनआईए ने इसे यूए (पी) एक्ट और दूसरी धाराओं के तहत फिर से दर्ज किया था। इस केस की शुरूआत तब हुई जब इस साल 31 मार्च की देर रात एक नाका पॉइंट पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े होने के आरोपी एक ओजीडब्लू को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने ओजीडब्लू के कब्जे से एक हैंड ग्रेनेड और ज़िंदा कारतूस बरामद किए थे। जांच के दौरान, उक्त साज़िश से जुड़े पाकिस्तानी आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया। स्थानीय स्तर उन्हें मदद देने वाले नेटवर्क के सदस्यों की पहचान और उनकी कथित भूमिका का भी पता लगाया गया।
अब तक हुई जांच से पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स और स्थानीय सहयोगियों के बीच कथित संबंधों का पता चला है। इन सहयोगियों का इस्तेमाल कथित तौर पर बातचीत, लॉजिस्टिक्स का इंतजाम, आतंकवादियों की आवाजाही और उन्हें छिपाने, पनाह देने, रेकी करने और दूसरी तरह की मदद के लिए किया जा रहा था। जांच में पूरे नेटवर्क और उसकी गतिविधियों के दायरे का पता लगाने के लिए पैसों के लेन-देन, बातचीत के तरीकों, आरोपियों की आवाजाही और हथियारों व विस्फोटकों के स्रोत की भी जांच की जा रही है।
शनिवार को हुई छापेमारी, उस बड़ी साज़िश और सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले कथित तंत्र की चल रही जांच का हिस्सा है। एनआईए ने जांच से जुड़े और सबूत जुटाए हैं। अब उन सबूतों की जांच की जा रही है। उक्त मामले में इकट्ठा की गई दूसरी चीजों से उनका मिलान किया जा रहा है। जांच के नतीजों के आधार पर आगे भी कई लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इस केस में कई गिरफ्तारियां और बरामदगी भी संभव हैं।