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NIA: गुजरात में 'अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट' की साजिश, यूं हुआ ऑनलाइन 'कट्टरपंथ' की पाठशाला का खुलासा

Sat, 17 Jan 2026 05:22 PM IST
ज्योति भास्कर डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

गुजरात के स्कूलों में कट्टरपंथी मानसिकता का प्रसार किए जाने की साजिश का पर्दाफाश हुआ है। एनआईए की जांच में पता लगा है कि ऑनलाइन साझा किए जा रहे कंटेंट के माध्यम से आरोपियों ने लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई भारतीय सरकार के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह और शरिया कानून पर आधारित खिलाफत की स्थापना का आह्वान किया गया। जानिए क्या है पूरा मामला
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एनआईए (सांकेतिक) - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने गुजरात में अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट (एक्यूआईएस) आतंकी समूह द्वारा कमजोर युवाओं के ऑनलाइन कट्टरपंथीकरण से संबंधित मामले में शनिवार को पांच आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है। इन आरोपियों में मोहम्मद फरदीन, कुरैशी सेफुल्ला, मोहम्मद फैक, जीशान अली और शमा परवीन शामिल हैं। इन सभी आरोपियों पर परमाणु हथियार अधिनियम (UA(P)), BNS अधिनियम और शस्त्र अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।

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एनआईए द्वारा दर्ज RC-02/2025/NIA/AMD मामले की जांच से पता चला है कि आरोपियों ने प्रतिबंधित एक्यूआईएस की भारत-विरोधी विचारधाराओं के प्रचार, समर्थन और प्रसार के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया था। उन्होंने विभिन्न सोशल मीडिया खातों के माध्यम से भड़काऊ पोस्ट, जिनमें वीडियो, ऑडियो और तस्वीरें शामिल हैं, प्रकाशित कीं। एनआईए ने आगे पाया कि इन पोस्टों के माध्यम से आरोपियों ने लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई भारतीय सरकार के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह और शरिया कानून पर आधारित खिलाफत की स्थापना का आह्वान किया था। उन्होंने भोले-भाले युवाओं को कट्टरपंथी बनाने के लिए अन्य प्रतिबंधित आतंकी संगठनों की चरमपंथी विचारधाराओं को भी बढ़ावा दिया।

एनआईए ने गुजरात एटीएस से इस मामले की जांच को अपने हाथ में लिया था। एटीएस ने जांच के दौरान पांच आरोपियों में से दो से कारतूस सहित सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल और तलवार जैसे घातक हथियारों के साथ-साथ कागजी और डिजिटल दोनों प्रारूपों में कई आपत्तिजनक सामग्री जब्त की थी। जांच के दौरान एनआईए ने डिजिटल फुटप्रिंट्स का पता लगाया। आपत्तिजनक पोस्टों की पहचान की, जिससे आरोपियों के खिलाफ सबूत मजबूत हुए।
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एनआईए की जांच के अनुसार, पुरानी दिल्ली निवासी मोहम्मद फैक ने जिहाद, ग़ज़वा-ए-हिंद और समाज के एक वर्ग के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देने वाली भड़काऊ सामग्री साझा करके इस साजिश में अहम भूमिका निभाई थी। उसने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट और इस उद्देश्य के लिए विशेष रूप से बनाए गए एक समूह के माध्यम से अक़ीस और जैश-ए-मोहम्मद के नेताओं की विचारधारा को बढ़ावा देने वाले चरमपंथी साहित्य के अंश प्रसारित किए। उसने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर इस हिंसक विचारधारा और सामग्री को व्यापक रूप से फैलाने की साजिश रची।

अहमदाबाद के शेख मोहम्मद फरदीन, गुजरात के मोदासा के कुरैशी सेफुल्ला और उत्तर प्रदेश के नोएडा के जीशान अली प्रतिबंधित आतंकी संगठनों को बढ़ावा देने वाली ऑडियो, वीडियो और अन्य पोस्ट के माध्यम से कट्टरपंथी सामग्री को फैलाने में सक्रिय रूप से शामिल पाए गए। उन्होंने इस मामले की साजिश रची। वे नियमित रूप से जिहाद, गजवा-ए-हिंद और लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई भारतीय सरकार के खिलाफ विद्रोह को उकसाने वाली पोस्ट को लाइक, कमेंट और उन पर सहयोग करते थे। साथ ही खिलाफत और शरिया कानून की वकालत भी करते थे।

जांच में यह भी पता चला कि कर्नाटक के बेंगलुरु की शमा परवीन ने सोशल मीडिया के माध्यम से एक्यूआईएस के वीडियो का प्रचार किया। पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद कट्टरपंथी सामग्री को बढ़ावा देने वाले चरमपंथी समूहों में सक्रिय रूप से भाग लिया। वह एक पाकिस्तानी नागरिक, सुमेर अली के नियमित संपर्क में थी, जिसे वह प्रतिबंधित साहित्य और अभियानों के स्क्रीनशॉट भेजती थी। उन पर चर्चा करती थी। उसके मोबाइल फोन में चरमपंथी विचारधाराओं द्वारा लिखित आपत्तिजनक पुस्तकें, वीडियो और पाकिस्तानी संपर्क नंबर मिले, जो सभी जांच के दौरान बरामद किए गए। बीएनएसएस की धारा 193(9) के तहत इस केस की जांच जारी है।

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