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सुनियोजित योजना के तहत की गई एनआईए अधिकारी की हत्या

Sun, 03 Apr 2016 10:25 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • जांच एजेंसियां तलाश रही आतंकी कनेक्शन
  • पेशवर शूटरों और ऑटोमेटिक हथियारों के इस्तेमाल ने बढ़ाई शंका
  • आतंकवाद से जुड़े कई संवदेनशील मामलों की जांच में थे शामिल थे तंजील
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क्या राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) अधिकारी तंजील अहमद की सनसनीखेज हत्या के तार आतंकवाद से जुड़े हैं? जांच में जुटी चार जांच एजेंसियां एनआईए, दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल, यूपी एसटीएफ और एटीएस इसी सवाल का जवाब ढूंढने में लगी है। दरअसल एनआईए में प्रतिनियुक्ति से आए बीएसएफ के असिस्टेंट कमांडेंट तंजील की हत्या को जिस सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया, उससे जांच एजेंसियों केकान खड़े हो गए हैं। एनआईए अधिकारी की हत्या के लिए बनाई गई मजबूत योजना, पेशेवर शूटरों और ऑटोमेटिक हथियारों का इस्तेमाल और बचने की सारी संभावना खत्म करने के लिए उन पर चलाई गई ताबड़तोड़ 24 गोलियां इसकेतार आतंकवाद से जुड़े होने का इशारा कर रहे हैं। तंजील वर्तमान में बिजनौर में हुए बम धमाका मामले के अलावा कई अन्य संवेदनशील मामलों की जांच से जुड़े थे। एनआईए ने भी आधिकारिक तौर पर इसे सुनियोजित हमला करार दिया है।
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एनआईए सूत्रों के मुताबिक हमलावरों को तंजील के अपनी भांजी की शादी में आने की पुख्ता जानकारी थी। हमलावरों ने इसी पुख्ता जानकारी के आधार पर उन्हें मारने की योजना तैयार की। तंजील की समारोह स्थल से अपनी वेगन आर कार से वापसी के दौरान हमलावरों ने बाइक से उनका करीब आधे घंटे तक पीछा किया। फिर कार को ओवरटेक करने के बाद ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई। इस दौरान तंजील की जीवित बचने की सारी संभावनाएं खत्म करने के लिए बेहद नजदीक से गोलियां बरसाई गई। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चलाई गई 24 गोलियों में से 9 गोलियां शरीर के आर पार हो गईं, जबकि 12 गोलियां मृत शरीर में निकाला गया।

सूत्रों के मुताबिक हमले में ऑटोमेटिक हथियार और 9 एमएम के बोर का इस्तेमाल किया गया है। साधारण अपराधी 9 एमएम की बोर का इस्तेमाल नहीं करते। इसके अलावा अगर यह पारिवारिक या अन्य तरह की रंजिश का मामला होता तो हमलावर परिवार के अन्य सदस्यों को भी निशाना बनाने से नहीं चूकते। इस मामले में साफ तौर पर प्रतीत होता है कि हमलावर सिर्फ तंजील की हत्या करने के लिए आए थे। क्योंकि हमलावरों ने इसी कार में बैठे उनके दोनों बच्चों को निशाना नहीं बनाया। चूंकि तंजील की पत्नी उनके बगल में बैठी थी, इसलिए उन्हें तंजील को निशाने पर ले कर चलाई गई गोलियां लगी।
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6 टीमें जुटी जांच में
मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए चार जांच एजेंसियों की 6 टीमें बनाई गई हैं। इनमें एनआईए और दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की एक-एक, यूपीए एसटीएफ और एटीएस की दो-दो टीमें शामिल हैं। तंजील आतंकवाद से संबंधित किन-किन मामलों की जांच से जुड़े थे, इसका खुलासा नहीं हो पाया है। कहा जा रहा है कि तंजील फिलहाल बिजनौर धमाके की जांच से जुड़े थे। अपुष्ट सूत्रों के मुताबिक तंजील पठानकोट हमला मामले की जांच से भी जुड़े थे। जांच के लिए जब पाकिस्तान का संयुक्त जांच दल यहां आया तो तंजील ने संपर्क अधिकारी की भूमिका निभाई थी।

दिल्ली लाया गया पार्थिव शरीर
पोस्टमार्टम के बाद 45 वर्षीय तंजील का पार्थिव शरीर उनके दिल्ली स्थित आवास शाहीनबाग लाया गया। गंभीर रूप से घायल उनकी पत्नी फरजाना का नोएडा के फोर्टिस अस्पताल में इलाज जारी है। फरजाना बटाला हाउस सीनियर सेंकेंडरी सरकारी स्कूल में अध्यापक हैं। परिवार करीब दो दशक से शाहीनबाग में रह रहा है।

राजनाथ की यूपी सरकार को नसीहत
एनआईए अधिकारी की सनसनीखेज हत्या मामले में गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने गहरी नाराजगी जताई है। सिंह ने उत्तर प्रदेश सरकार को राज्य में कानून व्यवस्था में सुधार लाने की नसीहत दी है।

5 साल से जुड़े थे एनआईए से
तंजील बीएसएफ में असिस्टेंट कमांडेंट थे। 5 वर्ष पूर्व उन्हें एनआईए में प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया। उर्दू की गहरी समझ के कारण पठानकोट हमला मामले की जांच में भी उनकी सेवा ली गईं थी। हालांकि वह इस हमले की जांच से जुड़े नहीं थे। 
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