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जाकिर नाईक के खिलाफ NIA ने दाखिल की चार्जशीट, आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप

Thu, 26 Oct 2017 08:43 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला
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राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने विवादित इस्लाम उपदेशक डॉ जाकिर नाईक के खिलाफ बृहस्पतिवार को स्पेशल कोर्ट में चार्जशीट पेश की। चार्जशीट में एनआईए ने जाकिर पर युवाओं को अपने भड़काऊ भाषण के जरिए उकसाने और भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया है।
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एनआईए ने मुंबई की विशेष अदालत में 65 पन्नों की चार्जशीट दायर की है जिसमें जाकिर नाईक पर घृणास्पद बयानबाजी और आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया है। एनआईए की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक चार्जशीट के साथ ही 1000 पन्नों के दस्तावेज भी कोर्ट में पेश किया गया है।

इन दस्तावेजों में 80 गवाहों के बयान दर्ज हैं। जाकिर पर आतंकियों को वित्तीय मदद देने और काले धन को सफेद करने का भी आरोप लगाया गया है। एनआईए ने जाकिर के भाषणों की सीडी, डीवीडी, टीवी कार्यक्रम, सोशल साइट और ब्लॉग पर उसके लेख आदि का भी आरोप पत्र में जिक्र किया है। जाकिर नाईक देश से बाहर हैं। जब सुरक्षा एजेंसियों ने शिकंजा कसा तब से वह भारत आने से डर रहा है।
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बीते साल एक जुलाई को बांग्लादेश की राजधानी ढाका के एक होटल में हुए बम धमाके के बाद जाकिर नाईक का आतंकी कनेक्शन सामने आया था। इस धमाके में दो पुलिस अधिकारी सहित 29 लोगों की मौत हो गई थी। हालांकि सभी पांचों हमलावर आतंकियों को मार गिराया गया था। जांच में पता चला था कि हमलावरों ने उस समय जाकिर नाईक के भाषणों का हवाला दिया था।

विदेशी चंदे से कराता था धर्मांतरण
जाकिर नाईक की संस्था आईआरएफ को विदेशों से बड़े पैमाने पर चंदे मिलते थे, जिसका इस्तेमाल वह धर्मांतरण और आतंकवाद के लिए करता था। मुंबई से चार छात्रों के आईएस में शामिल होने के बाद यह बात सामने आई थी कि चारो युवक जाकिर नाईक को मानते थे।

जाकिर एक स्कूल भी चलाता था, जिसमें लेक्चर ट्रेनिंग, हाफिज बनने की क्लास और इस्लाम से संबंधित कार्यक्रम होते थे। उसके बाद गृह मंत्रालय ने आईआरएफ के वित्तीय स्रोत की जांच के आदेश दिए और इसकी संस्था पर पांच साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया। 
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