इराक के इमिग्रेशन अधिकारी समेत दस से अधिक लोगों की गवाही के बाद यह साफ हो गया है कि ये चारों युवक आतंकवादी संगठन का हिस्सा बनकर भारत में तोड़फोड़ की गतिविधियों को अंजाम देना चाहते थे। एनआईए ने इस मामले में दो दिन पहले ही तीसरी पूरक चार्जशीट पेश की है। उसमें इन सभी बातों का सिलसिलेवार तरीके से जिक्र किया गया है।
जांच एजेंसी के आरोप पत्र में कहा गया है कि अरीब मजीद सहित चारों युवकों को कुवैत से फंडिंग की गई थी। इन चारों युवकों ने जब सोशल मीडिया के जरिए आईएसआईएस से जुड़ने की इच्छा जताई, तो उन्हें अब्दुल रहमान अल नाम के एक संदिग्ध व्यक्ति से पश्चिम एशिया की यात्रा करने के नाम पर पैसा दे दिया गया। मजीद से हुई पूछताछ के बाद एनआईए ने जब उक्त व्यक्ति के बारे में कुवैत की जांच एजेंसी को जानकारी दी, तो कुछ दिन बाद अब्दुल रहमान अल को गिरफ्तार कर लिया गया। अब्दुल रहमान ने स्वीकार किया कि उसने ही कथित तौर पर कल्याण से चार युवकों को पश्चिम एशिया की यात्रा करने के लिए पैसा दिया था।
एनआईए के आरोप पत्र में फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला की एक रिपोर्ट भी शामिल की गई है। 2018 में जांच एजेंसी के डाउनलोड किए गए एक वीडियो की सत्यता जांचने के लिए उसे राज्य की फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला में भेजा गया था। इस वीडियो में आईएस के तीन अन्य लापता युवक यानी मजीद के साथी दिखाई दे रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जब इस वीडियो फुटेज को उन युवकों के यात्रा दस्तावेजों के साथ लगे फोटो से मिलाया गया तो एनआईए का शक सही निकला। ये तीनों वही युवक थे जो मजीद के साथ सीरिया और इराक गए थे।
सीरिया में इन तीन युवाओं की उपस्थिति, वीडियो फुटेज से सत्यापित होती है। हालांकि इस वीडियो में मजीद नहीं देखा गया है। एनआईए ने एमईए से प्राप्त कई दस्तावेज भी विशेष अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। इसके अलावा भारत के महावाणिज्य दूतावास से संबंधित दस्तावेजों ने भी एनआईए की राह आसान बना दी। मजीद के खिलाफ जो मामले दर्ज हैं, उनमें भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए आतंकवादी अधिनियम, साजिश और भारतीय दंड संहिता की धारा 125 सहित कई धाराओं के तहत केस दर्ज किए गए हैं।