दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने एनआईए (NIA) की याचिका को स्वीकार कर लिया है। दरअसल, याचिका में सात विदेशी नागरिकों से जुड़े मामले की सुनवाई एजेंसी के मुख्यालय में करने की मांग की गई थी। इन आरोपियों पर म्यांमार के उग्रवादी समूहों को आधुनिक हथियार और ड्रोन चलाने की ट्रेनिंग देने का आरोप है।
पूर्वोत्तर के राज्यों में अमेरिकी-यूक्रेनी नागरिकों के खिलाफ चल रही जांच में बड़ा मोड़ आया है। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की याचिका को मंजूरी दे दी। दरअसल, एनआईए ने इस मामले को एनआईए मुख्यालय में स्थानांतरित करने की मांग की थी। एनआईए ने इसके पीछे सुरक्षा कारणों का हवाला दिया।
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सुरक्षा कारणों से बदला गया वेन्यू
एनआईए ने कोर्ट में दलील दी थी कि यह मामला संवेदनशील है। इसके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहरे प्रभाव हो सकते हैं। एजेंसी ने सुरक्षा का हवाला देते हुए अनुरोध किया था कि आरोपियों को सार्वजनिक अदालत में पेश करने के बजाय, जज खुद एनआईए मुख्यालय में सुनवाई करें। कोर्ट ने परिस्थितियों को समझते हुए आदेश दिया कि भविष्य की सभी सुनवाई अब वहीं होंगी। सभी आरोपियों को जज के समक्ष एनआईए के सुरक्षित परिसर में पेश किया जाएगा।
कौन हैं ये विदेशी आरोपी?
इस मामले में कुल सात विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें एक अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक और पेट्रो हुबरा, तारास स्लीव्याक, इवान सुकमानोव्स्की, मारियन स्टेफनकिव, मक्सिम होंचारुक और विक्टर कामिंस्की सहित छह यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, वैनडाइक को कोलकाता से पकड़ा गया था, जबकि अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी दिल्ली और लखनऊ से हुई थी।
जांच में खुलासा हुआ है कि ये सभी आरोपी टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे, लेकिन इनका असली मकसद कुछ और ही था। ये लोग अवैध रूप से मिजोरम के रास्ते म्यांमार की सीमा में घुसे और वहां के उग्रवादियों के संपर्क में आए। आरोप है कि इन्होंने वहां उग्रवादियों को अत्याधुनिक हथियार चलाने और घातक ड्रोन ऑपरेशन्स की ट्रेनिंग दी। इतना ही नहीं, इन पर यूरोप से ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग मशीन मंगाकर उग्रवादियों तक पहुंचाने का भी संगीन आरोप है।
पूर्वोत्तर में बड़ी साजिश की आशंका
एनआईए के मुताबिक, यह गिरोह साल 2024 से सक्रिय था। एजेंसी अब उन स्थानीय संपर्कों की तलाश कर रही है जिन्होंने इन विदेशी नागरिकों को रहने और बॉर्डर पार करने में मदद की। फिलहाल, एनआईए अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।