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Kerala: मुझे बेरहमी से पीटा... आरोपी ने सुनाई आपबीती; NIA कोर्ट ने दिए कार्रवाई के आदेश, CCTV पर भी उठाए सवाल

Mon, 24 Nov 2025 08:04 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम

सार

NIA Court on Custodial Torture: एनआईए कोर्ट ने विय्यूर हाई-सिक्योरिटी जेल में माओवादी आरोपी मनोज पर कथित हिरासत यातना के मामले में गंभीरता दिखाते हुए त्रिशूर सीजेएम को आगे की कार्रवाई करने का निर्देश दिया। अदालत ने जेल अधिकारियों के स्पष्टीकरण को असंतोषजनक मानते हुए सीसीटीवी सिस्टम की खराब स्थिति पर कड़ी टिप्पणी की। 
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अदालत - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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केरल की विय्यूर हाई-सिक्योरिटी जेल में हिरासत के दौरान एक आरोपी पर कथित रूप से की गई यातना के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। कोच्चि स्थित एनआईए की विशेष अदालत ने सोमवार को त्रिशूर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को आरोपी की शिकायत पर आगे की कार्रवाई करने का निर्देश दिया। अदालत ने जेल अधिकारियों के स्पष्टीकरण को असंतोषजनक पाया और पूरे मामले की गहराई से जांच की आवश्यकता बताई।

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यह मामला माओवादी केस के आरोपी मनोज से जुड़ा है, जिसने आरोप लगाया था कि 13 नवंबर को विय्यूर जेल में अधिकारियों ने उसके साथ बर्बरतापूर्ण मारपीट की। मनोज को बाद में तिरुवनंतपुरम के पूजापुरम सेंट्रल जेल भेज दिया गया। मामले की सुनवाई एनआईए विशेष अदालत के जज पी के मोहनदास ने की और पाया कि जेल प्रशासन की ओर से दिया गया स्पष्टीकरण रिकॉर्ड से मेल नहीं खाता।

स्पष्टीकरण पर सवाल
विय्यूर हाई-सिक्योरिटी जेल के अधीक्षक की ओर से दिए गए बयान में कहा गया था कि मनोज को किसी गंभीर चोट की वजह से इलाज की जरूरत नहीं थी। लेकिन अदालत ने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि उसी दिन यानी 13 नवंबर की शाम को कुछ जेल कर्मचारियों का इलाज त्रिशूर मेडिकल कॉलेज में हुआ। इसके बावजूद घायल आरोपी को इलाज नहीं दिया गया और उसे लगभग 300 किलोमीटर दूर दूसरी जेल ले जाया गया। अदालत ने इसे गंभीर चूक माना।
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सीसीटीवी सिस्टम की खराबी पर चिंता
अदालत ने जेल में लगे सीसीटीवी सिस्टम की खराब स्थिति पर भी कड़ी टिप्पणी की। एक पीडब्ल्यूडी असिस्टेंट इंजीनियर ने कोर्ट को बताया कि जेल में लगे 165 कैमरों में से केवल 9 ही चल रहे हैं और उनमें से सिर्फ एक कैमरा रिकॉर्डिंग कर रहा है। अदालत ने कहा कि हाई-सिक्योरिटी क्षेत्र में निगरानी तंत्र का इस तरह फेल होना गंभीर सुरक्षा जोखिम है। अदालत ने इंजीनियरों को तुरंत सिस्टम सुधारने और समय-सीमा सहित रिपोर्ट देने का आदेश दिया।

सीजेएम को भेजा पूरा मामला
अदालत ने मनोज की लिखित शिकायत और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की रिपोर्ट की जांच की। रिपोर्ट में पुष्टि की गई कि मनोज को गंभीर चोटें आई थीं। अदालत ने आदेश दिया कि शिकायत, मेडिकल रिकॉर्ड और इससे जुड़े सभी दस्तावेज त्रिशूर सीजेएम को भेजे जाएं ताकि जरूरी कार्रवाई शुरू हो सके। साथ ही मनोज की मेडिकल जांच एर्नाकुलम जनरल हॉस्पिटल में कराने और रिपोर्ट जमा करने के निर्देश दिए गए।
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जेल बदलने का अनुरोध खारिज
मनोज ने वापस विय्यूर हाई-सिक्योरिटी जेल में भेजने की मांग की, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि वहां सीसीटीवी सिस्टम खराब होने के कारण उसकी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती। इसलिए मनोज को थवनूर सेंट्रल जेल में शिफ्ट करने का आदेश दिया गया, जहां निगरानी प्रणाली ठीक से काम कर रही है। अदालत ने साफ किया कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आगे की कार्रवाई बेहद जरूरी है।

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