राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने केरल की एक विशेष अदालत में रिमांड के लिए दायर अर्जी में कहा है कि पीएफआई, इसके पदाधिकारी, सदस्य और इससे जुड़े लोग केरल में संवेदनशील युवाओं को भड़काकर लश्कर ए ताइबा, आईएस, अलकायदा आदि आतंकी समूहों में भर्ती करने के लिए तैयार करते थे। ये लोग आतंकी गतिविधियों के जरिये भारत में इस्लामिक शासन स्थापित करने की साजिश रच रहे थे। इसमें यह भी कहा गया है कि संगठन के सदस्य समुदायों के बीच दुश्मनी भड़काने, सौहार्द को खत्म करने में लगे थे।
एनआईए ने यह दावे पीएफआई की शैक्षिक शाखा के प्रभारी करमन अशरफ मौलवी के खिलाफ न्यायिक हिरासत की मांग वाले आवेदन में किए हैं। वहीं, नेताओं की बनी हिट लिस्ट से साफ है कि पीएफआई, जो अपने नेताओं और सदस्यों के जरिये काम कर रही थी, समुदायों के बीच दुश्मनी भड़काने में बहुत आगे बढ़ चुकी थी। इन दस्तावेज के आधार पर एनआईए ने कोर्ट को बताया कि मामले में आगे की जांच सिर्फ सबूत जुटाने के लिए ही नहीं बल्कि समाज में खून-खराबा रोकने के लिए भी जरूरी है।
पूर्व नियोजित थी हिंसा : विजयन
केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा है कि शुक्रवार को राज्य में पीएफआई की हड़ताल के दौरान हुई हिंसा पूर्वनियोजित थी। उन्होंने मामले में सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि सारी घटना राज्य के शांतिपूर्ण माहौल को बिगाड़ने के लिए की गई थी।
हम लगातार पीएफआई पर प्रतिबंध की मांग कर रहे : हिमंता
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व शर्मा ने कहा है कि उनकी सरकार इस बात को लेकर आश्वस्त है कि पीएफआई को प्रतिबंधित होना चाहिए और हम लगातार इसके लिए केंद्र सरकार से अनुरोध कर रहे हैं। हम चाहते है कि केंद्र सरकार आतंकी गतिविधियों के लिए माहौल बनाने के लिए इस संगठन के खिलाफ कार्रवाई करे।