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एल्गार परिषद मामला: एनआईए का दावा, माओवादी गतिविधियों को फैलाने के लिए तेलतुंबडे करता था विदेश दौरा

Wed, 04 May 2022 09:47 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भाकपा (माओवादी) की गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए तेलतुंबडे कनाडा, पाकिस्तान, अमेरिका, फ्रांस, आदि की अपनी यात्राओं की आड़ में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भाग लेता था।
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एनआईए - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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एल्गार परिषद-माओवादी लिंक मामले में एनआईए ने बुधवार को बड़ा दावा किया है। एनआईए ने मुंबई की एक विशेष अदालत को बताया कि एल्गर परिषद-माओवादी लिंक मामले का एक आरोपी कार्यकर्ता आनंद तेलतुंबडे सीपीआई (माओवादी) की गतिविधियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए कनाडा, पाकिस्तान और अमेरिका जैसे देशों का दौरा करता था।

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जांच एजेंसी ने बताया कि तेलतुंबडे भाकपा (माओवादी) का एक वरिष्ठ सदस्य है और शहरी क्षेत्रों में काम कर रहा है। एनआईए ने दावा किया कि एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय अभियान और दौरे के लिए सीपीआई (माओवादी) द्वारा तेलतुंबडे को 10 लाख रुपये के आवंटन के बारे में सबूत हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने विशेष अदालत के न्यायाधीश डी ई कोठालीकर के समक्ष तेलतुंबडे की आरोपमुक्त करने की याचिका के लिखित जवाब में ये दावे किए।

गौरतलब है कि अपने वकीलों सत्यनारायणन और नीरज यादव के माध्यम से दायर अपनी याचिका में तेलतुंबडे ने दावा किया है कि जांच एजेंसी ने यह दिखाने के लिए कोई सामग्री पेश नहीं की है कि वह सीपीआई (माओवादी) का सदस्य है या एल्गार-परिषद मामले में उसकी कथित भूमिका है। तेलतुंबडे को अप्रैल 2020 में एल्गार परिषद मामले से कथित संबंधों के लिए गिरफ्तार किया गया था। वह अभी नवी मुंबई की तलोजा जेल में बंद है।
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एनआईए ने अपने जवाब में कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भाकपा (माओवादी) की गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए तेलतुंबडे कनाडा, पाकिस्तान, अमेरिका, फ्रांस, आदि की अपनी यात्राओं की आड़ में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भाग लेता था। इन सम्मेलनों में ये लोग अंतरराष्ट्रीय कम्युनिस्ट संगठनों के साथ भाकपा (माओवादी) की विचारधारा, प्रशिक्षण और कार्य रणनीति पर साहित्य का आदान-प्रदान किया करते थे।

जांच एजेंसी ने आगे कहा कि आरोपी अपने भाई मिलिंद तेलतुंबडे से उसके शहरी क्षेत्र के दौरे के दौरान मिलता था और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के दौरान एकत्र किए गए माओवादी विचारधारा के साहित्य को साझा करते थे। 

आनंद तेलतुम्बडे के एक दावे का खंडन करते हुए एजेंसी ने कहा कि जांच से पता चला है कि भीमा कोरेगांव कार्यक्रम के संबंध में तेलतुंबडे की भूमिका की भाकपा (माओवादी) की केंद्रीय समिति ने सराहना की थी। 

एनआईए ने बताया कि तेलतुंबडे  गिरफ्तार आरोपी सुधीर धवले, रोना विल्सन, सुरेंद्र गाडलिंग, महेश राउत, शोमा सेन, वरवर राव, गौतम नवलखा, सुधा भारद्वाज, अरुण फरेरा, वर्नोन गोंजाल्विस, स्टेन स्वामी (मृतक), हनी बाबू और भाकपा के सदस्यों के संपर्क में था। ये सीपीडीआर के महासचिव और 'अनुराधा गांधी मेमोरियल कमेटी' (एजीएमसी) के सदस्य थे।

जांच एजेंसी ने कहा कि जांच के दौरान एकत्र किए गए सबूतों से पता चला है कि तेलतुंबडे एल्गार परिषद और भीमा कोरेगांव शौर्य दिन प्रेरणा अभियान कार्यक्रम के संयोजकों में से एक था। वह 31 दिसंबर, 2017 को परिषद आयोजित होने पर पुणे के शनिवार वाड़ा में मौजूद था।

दरअसल, यह मामला 31 दिसंबर 2017 को पुणे के शनिवारवाड़ा में आयोजित 'एल्गार परिषद' सम्मेलन में दिए गए कथित भड़काऊ भाषणों से संबंधित है। जिसके बारे में पुलिस ने दावा किया था कि इसी के कारण शहर के बाहरी इलाके में कोरेगांव-भीमा युद्ध स्मारक के पास अगले दिन हिंसा हुई थी। पुणे पुलिस ने दावा किया था कि इस कॉन्क्लेव को माओवादियों का समर्थन प्राप्त था।

बाद में इस मामले की जांच को एनआईए को स्थानांतरित कर दिया गया था। इस मामले में एक दर्जन से अधिक कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों को आरोपी के रूप में नामित किया गया है। अदालत इस मामले में 23 मई को आगे की सुनवाई करेगी।

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