राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने नवंबर 2025 में हरियाणा के सिरसा महिला पुलिस स्टेशन पर हुए ग्रेनेड हमले के संबंध में दो पाकिस्तानी नागरिकों सहित नौ आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है। आरोप पत्र में शामिल आरोपियों की पहचान पाकिस्तानी नागरिक और उनके संचालक शहजाद भट्टी और सोहेल अहमद उर्फ सोहेल बलूच के रूप में हुई है। इनके अलावा गिरफ्तार किए गए भारतीय नागरिक धीरज उर्फ धीरू, विकास उर्फ विक्की, संदीप उर्फ दैमर, विकास, सुशील उर्फ सिल्लू, मोहम्मद सिजान उर्फ सिजान उर्फ गाजी और गुरजंत सिंह भी आरोपी हैं।
इन धारा के तहत मामला दर्ज
पंचकुला स्थित विशेष एनआईए न्यायालय में दायर आरोप पत्र में आरोपियों पर यूए (पी) अधिनियम, बीएनएस और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। यह हमला पाकिस्तानी गैंगस्टर से आतंकवादी बने शहजाद भट्टी द्वारा रची गई एक साजिश का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य भारत में पुलिस प्रतिष्ठानों और कर्मियों को निशाना बनाकर लोगों में दहशत फैलाना था। एनआईए की केस संख्या आरसी-24/2025/एनआईए/डीएलआई की जांच के अनुसार, शहजाद और सोहेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और गुप्त संचार चैनलों के माध्यम से गिरफ्तार आरोपियों की भर्ती की और उन्हें कट्टरपंथी बनाया।
इस साजिश के तहत, उसने भारत में ऑपरेशनल मॉड्यूल स्थापित किए थे। स्थानीय गुर्गों को पुलिस प्रतिष्ठानों पर ग्रेनेड हमले करने का काम सौंपा था। धीरज उसका भारत स्थित प्रमुख गुर्ग था, जो स्थानीय मॉड्यूल के साथ हमलों के समन्वय के लिए जिम्मेदार था। एनआईए की जांच में आगे पता चला है कि संभावित लक्ष्यों की रेकी के बाद, आरोपियों ने हमले के लिए सिरसा स्थित महिला पुलिस स्टेशन को चुना था।
यह भी पता चला कि आरोपी गुरजंत सिंह से हमले में इस्तेमाल किया गया ग्रेनेड प्राप्त करने के लिए अमृतसर, पंजाब गए थे। 25 नवंबर 2025 को किए गए ग्रेनेड हमले को आरोपियों ने मोबाइल फोन पर रिकॉर्ड भी किया था ताकि इसे प्रसारित और प्रचारित किया जा सके।
एनआईए की जांच के अनुसार, हमले के बाद भी आरोपी अपने हैंडलर और उसके सहयोगियों के संपर्क में रहा। जांच में पाकिस्तान स्थित हैंडलर के निर्देशों पर आरोपियों द्वारा भर्ती, वित्तपोषण, परिचालन समन्वय, विस्फोटक पदार्थों की खरीद और आतंकवादी कृत्य को अंजाम देने की एक पूरी श्रृंखला स्थापित हुई। एनआईए ने विभिन्न डिजिटल, इलेक्ट्रॉनिक, दस्तावेजी और फोरेंसिक साक्ष्यों की गहन जांच की है। इस मामले में शामिल अन्य विदेशी संबंधों और वित्तीय चैनलों के साथ-साथ बड़ी साजिश की जांच जारी रखी है। फरार आरोपियों का पता लगाने के प्रयास भी जारी हैं।