इस कोर ग्रुप का काम एनएचआरसी और एनजीओ के बीच सहयोग के क्षेत्रों की पहचान करना है। इसके अलावा एनचआरसी की नागरिक समाज (सिविल सोसायटी) के साथ निरंतर और सार्थक बातचीत के लिए तंत्र तैयार करना है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने मानवाधिकार कार्यकर्ताओं (ह्यूमन राइट्स डिफेंडर्स) और गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) का एक कोर ग्रुप पुनर्गठित किया है। एक आधिकारिक अधिसूचना में यह जानकारी दी गई।
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भाजपा के पूर्व विधायक और पद्म श्री पुरस्कार विजेता जितेंद्र सिंह शंटी, आरआरएजी (रिस्क एनालिसिस ग्रुप) के निदेशक सुहास चकमा और पूर्व राजदूत भसवती मुखर्जी भी इस 13 सदस्यीय पुनर्गठित टीम का हिस्सा हैं।
अधिसूचना में जिन शर्तों का जिक्र किया गया है, उनके मुताबिक इस कोर ग्रुप का काम एनएचआरसी और एनजीओ के बीच सहयोग के क्षेत्रों की पहचान करना है। इसके अलावा एनचआरसी की नागरिक समाज (सिविल सोसायटी) के साथ निरंतर और सार्थक बातचीत के लिए तंत्र तैयार करना है।
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इस अधिसूचना में यह भी जिक्र किया गया है कि समूह नीतियों और कल्याणकारी योजनाओं के लाभों की भी समीक्षा करेगा और अंतराल को भरने के लिए एडवाइजरी जारी करने में मदद करेगा।