राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने उत्तर प्रदेश सरकार और मानव संसाधन विकास मंत्रालय को नोटिस जारी किया है। आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मोतीलाल नेहरू मेडिकल कालेज में सौ से ज्यादा छात्रों के साथ रैगिंग के मामले पर जारी किया है। साथ ही आयोग ने कालेज के प्रधानाचार्य से भी जवाब मांगा है।
आयोग के मुताबिक मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आया कि 30 अगस्त को इलाहाबाद के मोतीलाल नेहरू मेडिकल कालेज में प्रथम वर्ष के 150 छात्रों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिसमें 40 छात्राएं भी शामिल हैं। वहीं कुछ छात्रों ने विरोध किया तो उनके साथ मारपीट भी की गई। छात्रों ने मीडिया को बताया कि उन्हें यातनाएं दी गईं और धमकी दी गई कि अगर ऊपर शिकायत की तो उनका कैरियर बर्बाद कर दिया जाएगा।
आयोग ने इस मामले में उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव, मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सचिव और कॉलेज के प्रधानाचार्य को नोटिस जारी करके चार हफ्तों में विस्तृत जवाब मांगा है। साथ ही आयोग ने छात्रों की सुरक्षा को देखते हुए कालेज के दोषी छात्रों और अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने को कहा है।
आयोग ने देशभर के शैक्षणिक संस्थानों में सुप्रीम कोर्ट के आदेश बनी राघवन कमेटी की सिफारिशों के लागू करने को लेकर मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सचिव से स्टेटस रिपोर्ट देने को कहा है। आयोग ने यह रिपोर्ट चार हफ्तों में मांगी है। आयोग का कहना है कि देशभर के शैक्षणिक संस्थानों, स्कूल और कालेजों में रैंगिग पर प्रतिबंध है।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने इस बारे में दिशा निर्देश भी जारी किए हैं। इसके अलावा मेडिकल काउंसिल पहले ही मेडिकल कॉलेज ऑफ इंडिया (मेडिकल कॉलेजों/संस्थानों में रैगिंग की रोकथाम और निषेध) अधिनियम, 2009 के तहत मेडिकल कालेजों और संस्थानों में किसी भी प्रकार की रैंगिग को गैरकानूनी ठहरा चुकी है।