एनएचआरसी प्रमुख ने कहा कि हमें अपने पुलिस बलों की कार्यप्रणाली के बारे में किसी भी गलतफहमी की गुंजाइश को खत्म करके उनकी छवि में सुधार करना चाहिए। एनएचआरसी का उद्देश्य पुलिस के साथ चर्चा करके, पुलिस-संगठनों और विभिन्न हितधारकों के साथ-साथ कानून व्यवस्था की विश्वसनीयता में सुधार करना है।
एनएचआरसी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अरुण कुमार मिश्रा ने थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का पालन ना किए जाने पर चिंता जाहिर की है। उन्होंने गुरुवार को कहा कि राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के पुलिस संगठन हर थाने पर ऑडियो रिकॉर्डिंग और नाइट विजन वाले सीसीटीवी कैमरे लगाने के उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का अभी भी पूरी तरह पालन नहीं कर रहे हैं।
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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने द्वारा जारी बयान के मुताबिक, उन्होंने डेटा बैकअप के साथ पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरा लगाने के काम को सुनिश्चित करने के उपायों पर चर्चा के लिए आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए ये बातें कहीं। बयान में कहा गया है कि एनएचआरसी के अध्यक्ष ने कहा कि पुलिसिंग में पारदर्शिता होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि हमें अपने पुलिस बलों की कार्यप्रणाली के बारे में किसी भी गलतफहमी की गुंजाइश को खत्म करके उनकी छवि में सुधार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि एनएचआरसी का उद्देश्य पुलिस के साथ चर्चा करके, पुलिस-संगठनों और विभिन्न हितधारकों के साथ-साथ कानून व्यवस्था की विश्वसनीयता में सुधार करना है।
गौरतलब है कि दिल्ली में एनएचआरसी की जांच टीम द्वारा 32 पुलिस थानों के निरीक्षण के बाद बैठक आयोजित की गई थी। एनएचआरसी की जांच में पाया गया कि यूपी और हरियाणा में जिन 19 पुलिस थानों में जांच की गई, वहां 2-4 सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। वहीं, दिल्ली में निरीक्षण किए गए 13 पुलिस स्टेशनों में डीवीआर/एन-डीवीआर के साथ 10 कैमरे हैं। साथ ही, पुलिस मुख्यालय द्वारा लगाए गए कई सीसीटीवी कैमरे चालू हालत में नहीं पाए गए। इसके अलावा एनएचआरसी ने की जांच में यह भी पाया गया कि उपयुक्त स्थान पर सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए गए थे।