राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल प्लाजा के शौचालयों में गंदगी और खराब सुविधाओं की शिकायतों को दूर करने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसके तहत शौचालयों की सफाई, रखरखाव और पार्किंग व्यवस्था की निगरानी की जाएगी। लापरवाही मिलने पर जिम्मेदार एजेंसियों पर जुर्माना लगाया जाएगा। सुविधाओं की स्थिति पर नजर रखने के लिए स्मार्ट तकनीक का इस्तेमाल होगा।
शौचालयों की मरम्मत और सफाई पर जोर
मौजूदा शौचालयों की तकनीकी जांच के बाद उनकी मरम्मत और जरूरी सुधार किए जाएंगे। इसमें फर्श, पाइप, नल, रोशनी, हवा की निकासी और जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करना शामिल है। शौचालयों के आकार और यात्रियों की संख्या के आधार पर सफाई का समय तय होगा, ताकि सुविधाएं नियमित रूप से साफ रहें।
महिलाओं और दिव्यांगों के लिए बेहतर सुविधाएं
रात में सफर करने वाली महिलाओं और परिवारों की सुरक्षा के लिए शौचालयों और पार्किंग तक पहुंचने वाले रास्तों पर पर्याप्त रोशनी और सीसीटीवी निगरानी की व्यवस्था होगी। सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीनें भी लगाई जाएंगी। सार्वजनिक सुविधाओं की जानकारी देने वाले बोर्ड स्पष्ट रूप से लगाए जाएंगे। हर संबंधित टोल प्लाजा पर कम से कम एक ऐसा शौचालय होना जरूरी होगा, जिसका इस्तेमाल दिव्यांग आसानी से कर सकें। इसमें बाधारहित प्रवेश, उपयुक्त दरवाजे और सहारे के लिए ग्रैब बार जैसी सुविधाएं होंगी। पार्किंग स्थलों पर निर्धारित जगहों पर वाहन खड़े करने और जल निकासी की उचित व्यवस्था की जाएगी। भविष्य में इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग सुविधा लगाने का भी प्रावधान होगा।
पानी की कमी और खराबी पर मिलेगा अलर्ट
शौचालयों में पानी की उपलब्धता, दुर्गंध, सीवेज का स्तर, रिसाव, बिजली और इस्तेमाल की स्थिति पर स्मार्ट तकनीक से नजर रखी जाएगी। पानी की कमी, सीवेज भरने या उपकरण खराब होने पर अलर्ट मिलेगा, जिससे समय पर समस्या दूर की जा सकेगी। इस निगरानी से मिलने वाला डेटा एनएचएआई के केंद्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। अधिकारी एक ही डैशबोर्ड के जरिए सुविधाओं की स्थिति, रखरखाव, शिकायतों और एजेंसियों के कामकाज की निगरानी कर सकेंगे।
यात्री शौचालयों पर लगे क्यूआर कोड के जरिए राजमार्गयात्रा ऐप पर शिकायत और सुझाव दे सकेंगे। इसके अलावा, टचस्क्रीन की सुविधा भी होगी। शिकायतों और उनके समाधान का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाएगा।
मशीनों से होगी सेप्टिक टैंक की सफाई
सेप्टिक टैंक, सोख्ता गड्ढों और सीवर लाइनों की सफाई मशीनों से कराना अनिवार्य होगा। सेप्टिक टैंक, मैनहोल और सीवर लाइनों में उतरकर हाथ से सफाई करने पर पूरी तरह रोक रहेगी।
रोजाना निगरानी, लापरवाही पर जुर्माना
व्यवस्था की जांच के लिए अलग-अलग स्तर तय किए गए हैं। रोजाना निगरानी, हर सप्ताह तकनीकी निरीक्षण, हर महीने संयुक्त समीक्षा, तीन महीने में ऑडिट और सालाना तीसरे पक्ष से आकलन होगा। सुविधाओं की गुणवत्ता जांचने के लिए मौके पर निरीक्षण, निगरानी के आंकड़ों और यात्रियों की सत्यापित प्रतिक्रिया का इस्तेमाल किया जाएगा। समस्याओं को दूर करने के लिए समयसीमा तय होगी। नियमों का पालन नहीं करने पर एजेंसियों पर आर्थिक जुर्माना लगाया जाएगा। बार-बार लापरवाही करने वाली एजेंसियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जा सकेगी।