NGT ने उत्तर प्रदेश से जवाब मांगा है। ट्रिब्यूनल ने कहा- NMCG यूपी में बूढ़ी गंगा नदी का उद्गम स्थल खोजकर बताए। दरअसल, याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि सरकारी अधिकारियों ने जो उद्गम स्थल खोजा है वो गलत है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) को उत्तर प्रदेश में बूढ़ी गंगा नदी के उद्गम स्थल और गंगा नदी या उसकी किसी सहायक नदी में मिलने तक उसके पूरे रास्ते की पहचान करते हुए हलफनामा दाखिल करने को कहा है। बुधवार को जारी तीन अगस्त के इस आदेश में एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने कहा कि यह हलफनामा सुनवाई की अगली तारीख 16 अक्तूबर से कम से कम एक हफ्ते पहले दाखिल किया जाना चाहिए।
विज्ञापन
यूपी के सिंचाई विभाग की रिपोर्ट मे ंक्या?
दरअसल, यह मामला बूढ़ी गंगा नदी पर अतिक्रमण से जुड़ा है। अधिकरण ने पहले अधिकारियों को नदी के बाढ़ क्षेत्र का सीमांकन करने का निर्देश दिया था। एनजीटी ने कहा कि यूपी के सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, गंगा कायाकल्प आदेश, 2016 के तहत एनआईएच (एनआईएट) रुड़की की रिपोर्ट के आधार पर नदी के बाढ़ वाले इलाके के सभी चार हिस्सों में सीमा पिलर लगाने का काम 30 अगस्त 2026 तक पूरा करने का प्रस्ताव है। मुजफ्फरनगर जिले में सभी 277 पिलर लगा दिए गए हैं, जबकि मेरठ और हापुड़ जिलों में 50 फीसदी से अधिक काम पूरा हो चुका है।
याचिकाकर्ता का दावा- यूपी के अधिकारियों का गलत उद्गम स्थल खोजा
दरअसल, इस मामले में याचिकाकर्ता ने राज्य अधिकारियों के बताए उद्गम स्थल को गलत बताते हुए दावा किया कि उसके पास 200 साल पुराना एक प्रामाणिक नक्शा है, जिसके अनुसार नदी मुजफ्फरनगर के देवल गांव से निकलकर हापुड़ जिले के गढ़मुक्तेश्वर तक बहती है।
विज्ञापन
NGT का आदेश- NMCG के महानिदेशक नक्शे की ठीक से जांच करें
इस पर एनजीटी ने याचिकाकर्ता को एक हफ्ते के भीतर अपना नक्शा और दस्तावेज एनएमसीजी को सौंपने की इजाजत देते हुए कहा कि एनएमसीजी के महानिदेशक इसकी ठीक से जांच कर अपने पास मौजूद दूसरी जानकारी पर ध्यान देते हुए एक हलफनामे के जरिये रिपोर्ट सौंपेंगे।