राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने मेघालय पर 109 करोड़ रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा लगाने से परहेज किया है। दरअसल, एनजीटी ने यह कदम इसलिए उठाया है क्योंकि राज्य पहले ही ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन के लिए जरूरी धनराशि देने के लिए अपनी प्रतिबद्धता जता चुका है। गौरतलब है कि एनजीटी नगरपालिका ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 और राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अन्य पर्यावरणीय मुद्दों पर किए गए कामों की निगरानी कर रहा है।
राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्ति एके गोयल की पीठ ने कहा कि पाया गया है कि राज्य में ठोस और तरल कचरे के उत्पादन और निपटान की अवधि में अंतर था। ठोस और तरल कचरे के निपटान के लिए समयसीमा में संशोधन और समयबद्ध कार्य योजना को अमलीजामा पहनाना, समस्या को हल करने के लिए उठाए जाने वाले आवश्यक कदमों में से एक थे। प्राधिकरण की पीठ में न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और विशेषज्ञ सदस्य अरुण कुमार त्यागी और ए सेंथिल वेल भी शामिल हैं।
ग्रीन ट्रिब्यूनल ने कहा कि कचरा प्रबंधन की योजना, क्षमता निर्माण और अपशिष्ट प्रबंधन की निगरानी के लिए राज्य स्तर पर केंद्रीकृत एकल खिड़की तंत्र की स्थापना भी की जानी चाहिए।