एनजीटी ने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को आरओ प्यूरिफायर पर प्रतिबंध लगाने के लिए अधिसूचना जारी करने में देरी के लिए कड़ी फटकार लगाई है। यह प्रतिबंध उन स्थानों के लिए है, जहां प्रति लीटर पानी में पूर्णत: घुले ठोस पदार्थ (टीडीएस) की मात्रा 500 मिलीग्राम से कम हो।
एनजीटी ने साथ ही संबंधित अधिकारियों के वेतन रोकने की भी चेतावनी दी। एनजीटी के चेयरपर्सन जस्टिस एके गोयल की पीठ ने कहा कि उसके आदेश को लागू करने में देरी से लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर बुरा असर पड़ रहा है। पेशी के दौरान मौजूद अधिकारी इस आदेश के अनुपालन न होने को लेकर कोई जायज कारण नहीं बता सके।
पीठ ने कहा कि यह आदेश एनजीटी की धारा 25 के तहत बाध्यकारी फैसला है। पर्यावरण मंत्रालय के अधिकारी आदेश के अनुपालन न करने के खिलाफ कार्रवाई करने को जवाबदेह हैं। एनजीटी ने मंत्रालय को 31 दिसंबर, 2019 तक आदेश के अनुपालन के लिए एक आखिरी मौका दिया है। पीठ ने कहा कि अगले साल 10 जनवरी को उपचारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
आरओ से जरूरी खनिज पदार्थ नष्ट होने के बारे में लोगों को जागरूक करें
दरअसल आरओ के इस्तेमाल के नियमन के लिए एनजीटी ने सरकार को निर्देश दिया था कि जहां प्रति लीटर टीडीएस 500 मिलीग्राम से कम हो, वहां इसके इस्तेमाल पर रोक लगाए। साथ ही इससे पानी की बर्बादी रोके और लोगों को आरओ के कारण पानी के जरूरी खनिज पदार्थ नष्ट होने के बारे में भी जागरूक करें।