राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की तरफ से तैनात चार सदस्यीय पैनल ने दिल्ली में भूजल दोहन रोकने को खेती के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में शोधित जल उपलब्ध कराने की सिफारिश की है।
एनजीटी पीठ के सामने दाखिल रिपोर्ट में पैनल ने कहा है कि दिल्ली सरकार को यह पानी सिंचाई विभाग की नहरों के नेटवर्क के जरिये खेतों तक भेजने पर विचार करना चाहिए। साथ ही सेवानिवृत्त जस्टिस एसपी गर्ग की अध्यक्षता वाले पैनल ने कृषि क्षेत्र को भी भूजल उपयोग के नियमन के दायरे में लाए जाने की सिफारिश की है।
एनजीटी पैनल ने कहा, राजधानी में भूमि स्वामित्व वाली एजेंसियों को भी जल निकायों के पुनर्जीवन के लिए शोधित सीवर जल के अधिकतम उपयोग पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। पैनल के मुताबिक, कृषि के लिए शोधित जल उपलब्ध कराए जाने से दिल्ली जल बोर्ड के पास मौजूद अतिरिक्त शोधित सीवर जल के उपयोग में भी मदद मिलेगी।
पैनल ने कहा, शोधित जल ऐसा अहम संसाधन है, जिसकी लंबे समय से अनदेखी की जा रही है। उपलब्ध पेयजल पर दबाव घटाने के लिए शोधित जल के उपयोग को बढ़ाए जाने का प्रयास करना आवश्यक है। बता दें कि राजधानी में 20 सीवर ट्रीटमेंट प्लांट हैं, जो रोजाना करीब 50 करोड़ गैलन सीवर जल शोधित करते हैं। इसमें से फिलहाल 95 एमजीडी पानी ही उपयोग हो पा रहा है।
राष्ट्रीय राजधानी में 64 मीटर गहराई तक पहुंचा भूजल
राष्ट्रीय भूभौतिकी अनुसंधान संस्थान के अध्ययन के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी में भूजल स्तर हर साल 10 सेंटीमीटर की खतरनाक दर से नीचे जा रहा है। केंद्रीय भूजल बोर्ड के मुताबिक, दिल्ली के कुछ हिस्सों में भूजल सतह से करीब 1.2 मीटर नीचे मिल जाता है। इनमें से अधिकतर इलाके यमुना के बाढ़ क्षेत्र के करीब हैं। लेकिन बाकी दिल्ली में भूजल 64 मीटर तक गहराई में पहुंच चुका है।
यह भी की हैं सिफारिशें
- सरकार भूजल रिचार्ज के उचित आकलन को कई जगह पिजोमीटर लगाए।
- सरकार रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराए।
- मौजूदा जल निकायों को अतिक्रमण मुक्त रखने को उनकी जियो-टैगिंग हो।
- हर जल निकाय की पहचान को एक यूनिक आईडी तय की जाए।
- भूस्वामित्व एजेंसियां एनजीटी आदि के निर्देश लागू करने को ‘एनफोर्समेंट विंग’ बनाए।
- विंग के अधिकारियों के पास नियम तोड़ने वालों को अभियोजित करने का अधिकार हो।