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गिरिराज गोवर्धन पर्वत और परिक्रमा मार्ग पर अवैध संचरनाओं को ध्वस्त करने का आदेश 

Sat, 16 Jun 2018 12:06 PM IST
विवेक मिश्रा, नई दिल्ली
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गिरिराज गोवर्धन पर्वत
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने फिर से गोवर्धन पर्वत और परिक्रमा मार्ग पर मौजूद सभी अवैध संरचनाओं को धवस्त करने का आदेश दिया है। पीठ ने कहा कि प्रशासन यह भी ख्याल रखेगा कि यदि मार्ग या उसके आस-पास 25 अक्तूबर, 1980 से पहले के मंदिर और तप व साधना के लिए बनाई गई साधु कुटिया या छप्पर मौजूद है तो उसे किसी भी तरह का नुकसान न पहुंचाया जाए। एनजीटी ने कहा कि 25 अक्तूबर 1980 से ही वन संरक्षण कानून प्रभावी हुआ था इसलिए इससे पहले से मौजूद मंदिरों को नुकसान न पहुंचाया जाए। 
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दोबार निर्माण पर चलेगा आपराधिक मुकदमा

जस्टिस आरएस राठौर की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह भी स्पष्ट किया है कि छप्पर और समाधि के लिए किसी तरह का पक्का और कच्चा निर्माण कार्य नहीं किया जा सकेगा। न ही कंक्रीट और ईंट के इस्तेमाल की इजाजत होगी। पीठ ने कहा कि जहां से अतिक्रमण हटाया जा चुका है वहां यदि कोई भी व्यक्ति दोबारा निर्माण या संरचना बनाने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ आपराधिक मामला चलाया जाए। 

पीठ ने कहा कि प्रशासन यह सुनिश्चित करे कि श्रद्धालु बिना किसी बाधा के पवित्र गिरिराज पर्वत के दर्शन कर सकें। अवैध संरचनाएं हटाई जाएं ताकि श्रद्धालु पर्वत को स्पष्ट तौर पर देख पाएं। 
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प्रशासन को रहना होगा मुस्तैद

पीठ ने पुलिस उपाधीक्षक को आदेश दिया है कि वह सुनिश्चित करें कि जहां अतिक्रमण हटाया जा चुका है वहां दोबारा किसी तरह की संरचना न बनने पाए। जिला प्रशासन मुआयना कर इसे सुनिश्चित करे। यदि कोई आदेशों का उल्लंघन करता पाया जाए तो तत्काल उसके खिलाफ उचित कानूनी कदम उठाए जाएं। 
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जनसुविधाएं पर्वत की तरफ नहीं बने

गिरिराज गोवर्धन पर्वत
वहीं पीठ ने कहा कि गिरिराज पर्वत के आस-पास किसी तरह की मल-मूत्र संबंधी जनसुविधाएं न मौजूद हों। जो भी व्यवस्था की जाए वह परिक्रमा मार्ग के दूसरी तरफ बनना चाहिए। पीठ ने कहा कि गिरिराज पर्वत के तरफ परिक्रमा के कच्चे मार्ग का चौड़ीकरण नहीं होना चाहिए। बाहरी इलाके में ही इस तरह का कार्य होना चाहिए।

दोबारा निर्माण होने पर संबंधित अधिकारी जिम्मेदार 

वहीं हाल ही में हटाए गए अतिक्रमण के कारण निकले मलबे को भी वन भूमि से एनजीटी ने जल्द से जल्द हटाने के लिए कहा है। पीठ ने कहा कि पूरे इलाके की कड़ी निगरानी होनी चाहिए। यदि कोई निर्माण कार्य अतिक्रमण हटाए जाने वाले स्थान पर होता है तो इसका जिम्मेदार संबंधित अधिकारी ही व्यक्तिगत तौर पर होगा। 
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