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एनजीटी ने वेटलैंड पर राज्यों और पर्यावरण मंत्रालय से मांगा जवाब

Sat, 23 Jul 2016 03:55 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नईदिल्ली
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल
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उत्तर प्रदेश समेत देश के हर राज्यों में वेटलैंड (आद्रभूमि) के संरक्षण को लेकर प्राधिकरणों के हीलाहवाली पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कड़ा ऐतराज जताया है। एनजीटी ने उत्तर प्रदेश सरकार को आदेश दिया है कि वे एक हफ्ते के भीतर हलफनामा दाखिल कर सभी मौजूद वेटलैंड की पूरी जानकारी ट्रिब्यूनल के सामने पेश करें। 
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पीठ ने कहा कि हलफनामे में 500 एकड़ से ज्यादा क्षेत्र वाले वेटलैंड, संरक्षित और संरक्षित दायरे से बाहर मौजूद वेटलैंड की पूरी सूची बताएं, साथ ही सरकार जवाब दें कि उन्होंने अभी तक कितने वेटलैंड की पहचान की है। 

जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने आनंद आर्या और पुष्प जैन की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया। पीठ ने कहा कि उत्तर प्रदेश वेटलैंड मामले की सुनवाई एक अगस्त को होगी। बाकी अन्य राज्यों की सुनवाई 31 अगस्त को होगी। 
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पीठ ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान अफने निर्देश में कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार पर्यावरण मंत्रालय को एक हफ्ते के भीतर अपनी सिफारिशें दें। वहीं पर्यावरण मंत्रालय को भी जवाब देने का निर्देश दिया है। पीठ ने पूछा है कि मंत्रालय बताए कि उसने वेटलैंड संरक्षण को लेकर क्या कदम उठाए हैं और इन्हें संरक्षित करने में कितना वक्त लगेगा।
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पीठ ने मंत्रालय से ट्रिब्यूनल के आदेशों का पालन करने को कहा

एनजीटी से उम्मीद लगाए बैठे अवैध कब्जाधारकों को तगड़ा झटका लगा है।
पीठ ने मंत्रालय से ट्रिब्यूनल के आदेशों का पालन करने के संबंध में एक रिपोर्ट भी दाखिल करने को कहा है। वहीं पीठ ने सुनवाई के दौरान उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश, गुजरात की ओर से अधिवक्ता के न पेश होने पर इन राज्यों को नोटिस जारी किया है।

वहीं चेताया है कि यदि भविष्य में ऐसा होगा तो दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। पीठ ने सभी राज्यों को निर्देश दिया है कि वे अपना जवाब तीन हफ्तों के भीतर दाखिल करें। यह उनके लिए आखिरी मौका होगा। 

वहीं सुनवाई के दौरान केंद्रीय वेटलैंड नियामक प्राधिकरण की उदासीनता के आरोप पर अपने निर्देश में कहा है कि पर्यावरण मंत्रालय हलफनामा दाखिल कर यह बताए कि प्राधिकरण ने वेटलैंड को लेकर कितनी बार बैठक की है।

वहीं पीठ ने वेटलैंड की पहचान कर उन्हें अधिसूचित करने के लिए केंद्रीय वेटलैंड नियामक प्राधिकरण को हर महीने राज्यों के साथ बैठक करने का भी निर्देश दिया है। पीठ ने कहा कि सभी राज्य अलग-अलग एक हलफनामा भी दाखिल करेंगे।

इसके अलावा पर्यावरण मंत्रालय के प्रधान सचिव (पर्यावरण एवं वन) भी एक हलफनामा दाखिल कर यह बताएंगे कि उन्होंने वेटलैंड को अधिसूचित करने के लिए क्या लक्ष्य तय किया है। अभी तक कितने वेटलैंड चिन्हित और अधिसूचित किए गए हैं। इस मामले की सुनवाई 31 अगस्त को होगी। 
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