एनजीटी ने आदेश में उन्होंने कहा, अपशिष्ट प्रबंधन की योजनाओं को बिना देरी के जिला, शहर, कस्बा और गांव स्तर पर एक साथ लागू किया जाना चाहिए। आदेश का अनुपालन मुख्य सचिव की ओर से सुनिश्चित किया जाएगा।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कथित तौर पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले ठोस और तरल अपशिष्ट पदार्थों का प्रबंधन नहीं करने पर मिजोरम राज्य पर 50 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। यह आदेश जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की खंडपीठ ने बीते बृहस्पतिवार को पारित किया। अपने आदेश में उन्होंने कहा, अपशिष्ट प्रबंधन की योजनाओं को बिना देरी के जिला, शहर, कस्बा और गांव स्तर पर एक साथ लागू किया जाना चाहिए। आदेश का अनुपालन मुख्य सचिव की ओर से सुनिश्चित किया जाएगा।
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ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा, सीवेज उत्पादन और उपचार में 23.94 एमएलडी का अंतर है। पर्यावरणीय को जो नुकसान पहुंचा अनुमानित रूप से उसका मुआवजा 50 करोड़ रुपये है। सचिव, रक्षा मंत्रालय, डीजी, एमईएस, रक्षा संपदा और अन्य संबंधित प्राधिकरण यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य को लेकर पर्याप्त कदम उठाए जा रहे हैं। वे सरकार के उपायों की निगरानी भी कर सकते हैं।