डीजल और पेट्रोल में मिलावट की पुष्टि को लेकर देशभर में कई प्रयोगशालाओं ने अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। वहीं नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने अब केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय और सभी तेल कंपनियों से ही पूछा है कि वे बताएं कि तेल की अशुद्धता को जांचने के लिए वे किस विधि का प्रयोग करती हैं। साथ ही वह कौन सी प्रयोगशाला है जो इस तरह का जांच करती है। पीठ ने कहा कि सभी तीन हफ्तों के भीतर इन सवालों के जवाब हलफनामे के साथ दें।
जस्टिस जावद रहीम की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्ली निवासी चेरूब सिंगला के मामले पर सुनवाई की। पीठ ने कहा कि उन्हें इस संबंध में कुछ और जानकारी चाहिए कि प्रयोगशालाएं ईंधन में मिलावट और प्रदूषण संबंधी जांच किस प्रक्रिया के जरिए करती हैं साथ ही नमूनों का विश्लेषण करने के लिए केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय और तेल कंपनियां किस प्रयोगशाला की सेवाएं ले रही हैं।
वहीं सुनवाई में पेट्रोलियम मंत्रालय और तेल कंपनियों की ओर से पेश एडीशनल सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए। मामले की अगली सुनवाई 9 मार्च को की जाएगी।