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Solar Panel: इस्तेमाल के बाद सोलर पैनलों की सही रिसाइक्लिंग नहीं करने पर NTG सख्त, केंद्र सरकार को नोटिस

Fri, 27 Dec 2024 05:36 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

उत्तर प्रदेश के एक किसान द्वारा दाखिल की गई पत्र याचिका पर सुनवाई के दौरान एनजीटी ने आदेश केंद्र से जवाब मांगा। दरअसल, याचिका में इस्तेमाल किए गए सोलर पैनलों के सही तरीके से निपटान की सुविधाओं की कमी की शिकायत की गई थी।
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एनजीटी - फोटो : संवाद
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विस्तार
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने फोटोवोल्टिक (पीवी) सोलर पैनलों के गलत तरीके से निपटान और रिसाइक्लिंग पर केंद्र से जवाब मांगा है। बता दें, यह आदेश उत्तर प्रदेश के एक किसान द्वारा दाखिल की गई पत्र याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसमें इस्तेमाल किए गए सोलर पैनलों के सही तरीके से निपटान की सुविधाओं की कमी की शिकायत की गई थी।

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यूपी के किसान ने दी शिकायत
एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए. सेंथिल वेल की पीठ ने 23 दिसंबर को कहा, 'याचिकाकर्ता का कहना है कि सोलर पैनल का उपयोग उनके गांव में कृषि क्षेत्रों में सिंचाई के लिए कुसुम योजना के तहत 2019 से किया जा रहा है और उन्होंने क्षतिग्रस्त सोलर पैनलों के जीवन चक्र प्रबंधन में अंतर को उजागर किया है।'

क्या बोली एनजीटी?
पीठ ने यह भी कहा कि याचिका के अनुसार, इन सोलर पैनलों की मरम्मत नहीं की जा सकती थी और इन्हें स्क्रैप के रूप में निपटाया जाना था, लेकिन सही निपटान संरचना की कमी के कारण इन पैनलों को दफनाया या लैंडफिल्स में भेजा जा रहा था, जो मिट्टी की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा था।
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इन मुद्दों को भी उठाया गया
एनजीटी ने कहा कि याचिका में कई मुद्दों को उठाया गया है, जिनमें पैनलों का सीमित स्क्रैप मूल्य, क्योंकि स्क्रैप डीलर केवल एल्यूमिनियम, तांबा और कांच के घटकों को स्वीकार करते हैं, जबकि बाकी सामग्री, जैसे पॉलिमर और सिलिकॉन, पुनर्नवीनीकरण योग्य नहीं होते और इन्हें लैंडफिल्स में भेजना पड़ता है। पीवी पैनलों में सीसा और कैडमियम जैसे भारी धातु होते हैं, जो मिट्टी और पानी में घुल सकते हैं, जिससे दीर्घकालिक पर्यावरणीय नुकसान हो सकता है। इसके अलावा, क्षेत्र में क्षतिग्रस्त सोलर पैनलों के सुरक्षित निपटान या रिसाइक्लिंग के लिए कोई स्थापित तंत्र नहीं है।

ट्रिब्यूनल ने कहा कि पत्र याचिका में पर्यावरणीय मानदंडों के अनुपालन, विशेष रूप से ई-कचरा (प्रबंधन) नियमों के प्रावधानों के कार्यान्वयन से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए हैं।

इन लोगों को नोटिस
एनजीटी ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिवों को प्रतिवादी या पक्षकार बनाया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) तथा उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) के सदस्य सचिवों के साथ-साथ एमओईएफसीसी के लखनऊ क्षेत्र कार्यालय को भी पक्षकार बनाया गया।
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ट्रिब्यूनल ने कहा कि उक्त को नोटिस जारी किया जाए। साथ ही मामले की आगे की सुनवाई 10 फरवरी को निर्धारित की।

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