राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने एक जॉइंट पैनल बनाया है, जो मध्य प्रदेश के सिंगरौली और उत्तर प्रदेश के सोनभद्र क्षेत्रों में विभिन्न थर्मल पावर स्टेशनों से फ्लाई ऐश के परिवहन (ट्रांसपोर्टेशन) से होने वाले वायु प्रदूषण पर एक तथ्यामक रिपोर्ट पेश करेगी। फ्लाई ऐश, कोयला पर आधारित बिजली स्टेशनों का उप-उत्पाद (बायप्रोडक्ट) है।
एनजीटी एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें दावा किया या था कि फ्लाइ ऐश के ट्रांसपोर्टेशन की निगरानी (मॉनिटरिंग) और पर्यवेक्षण (सुपरवाइजिंग) के जिम्मेदार अधिकारी कानून के प्रावधानों और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रम बोर्ड (सीपीसीबी) के दिशानिर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं।
न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और विशेषज्ञ सदस्य ए. सेंथिल वेल की पीठ ने एक जॉइंट पैनल का गठन किया, जिसमें पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, सीपीसीबी और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि शामिल हैं।
ग्रीन पैनल ने कहा, रिपोर्ट में सिंगरौली और सोनभद्र कार्य योजना के अनुसार फ्लाई ऐश के ट्रांसपोर्टेशन से जुड़े प्रावधानों के अनुपालन पर प्रकाश डाला जाएगा, ताकि गंभीर रूप से प्रदूषित इस क्षेत्र की पर्यावरणीय गुणवत्ता को बनाए रखा जा सके।
एनजीटी ने कहा, पैनल को तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी है। समन्वय (कॉ-ऑर्डिनेशन) और अनुपालन के लिए सीपीसीबी नोडल एजेंसी होगी। मामले में आगे की कार्रवाई 3 मार्च, 2023 को होगी।
याचिका के मुताबिक, फ्लाई ऐश के ट्रांसपोर्टेशन से सिंगरौली और सोनभद्र में सड़कों और रिहाइशी इलाकों में भारी वायु प्रदूषण हो रहा है।