राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने गंगा में प्रदूषण की निगरानी करने वाली समिति का कार्यकाल बढ़ा दिया है। इसी समिति पर उत्तर प्रदेश में पर्यावरण नियमों के पालना की निगरानी की भी जिम्मेदारी है।
एनजीटी अध्यक्ष जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, जब तक उत्तर प्रदेश सरकार कोई अन्य प्रभावी वैकल्पिक प्रणाली का गठन नहीं करती, समिति को बंद करना उचित नहीं होगा। इसलिए निगरानी समिति का कार्यकाल छह महीने के लिए बढ़ाया जाएगा।
पीठ ने कहा कि यदि राज्य सरकार के पास कोई और सुझाव है तो वह सकती है। हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस एसवीएस राठौर की अध्यक्षता वाली समिति का शुरुआती कार्यकाल छह महीने का था जिसे समय-समय पर बढ़ाया जाता रहा है।