बिगड़ते पर्यावरण और अंधाधुंध काटे जा रहे पेड़ों को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कहा है कि अब वह दिन दूर नहीं जब लोग अपनी पीठ पर ऑक्सीजन सिलेंडर लाद कर चलेंगे। जब पेड़ ही नहीं रहेंगे तो ऑक्सीजन कहां से मिलेगी।
प्रधान पीठ ने हिमाचल प्रदेश में परवाणु से शोघी तक राष्ट्रीय राजमार्ग का चौड़ीकरण करने के लिए प्राधिकरणों के जरिए पेड़ काटने की अनुमति मांगने पर हिमाचल की सरकार व संबंधित प्राधिकरणों को जमकर फटकार लगाई। पीठ ने कहा कि परियोजना को हरी झंडी देने के बाद से एक अदद पेड़ भी संबंधित इलाके में नहीं लगाया गया है।
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने सोमवार को स्वत: संज्ञान मामले पर सुनवाई के दौरान यह सख्त टिप्पणी की। अब प्रधान पीठ इस मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को करेगी। पीठ ने कहा कि आधा देश बाढ़ जैसी गंभीर समस्या झेल रहा है जबकि आधा देश सूखे की मार से परेशान है।
शिमला में लगातार तापमान में बढ़ोतरी हो रही है। इसकी वजह से बर्फ गल रही है। तापमान बढ़ने के कारण पहाड़ी इलाकों में ग्लेशियर पिघलने की समस्या तेजी से बढ़ रही है। पीठ ने प्राधिकरणों की ओर से पेश अधिवक्ताओं से कहा कि यदि आप लोगों की ओर से एक पेड़ भी लगाया गया हो तो साक्ष्य पेश कीजिए। कहा क्या सड़कें आपको ऑक्सीजन देंगी? सिर्फ पेड़ ही तो हैं जो आपको ऑक्सीजन दे सकते हैं।
वहीं सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि यह परियोजना राष्ट्रीय महत्व की है। इस पर पीठ ने कहा कि हम देखेंगे कि क्या राष्ट्रीय महत्व का है। पहले जाओ और एक लाख पौधे लगाओ फिर ट्रिब्यूनल में आओ।
एनजीटी ने राष्ट्रीय राजमार्ग के चलते हिमाचल प्रदेश में परवाणु से शोघी तक पेड़ों को काटे जाने पर स्वत: संज्ञान लिया था। इसके बाद एनजीटी ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, हिमाचल प्रदेश सरकार और वन क्षेत्र के मुख्य संरक्षक को इस मामले में हलफनामा व रिपोर्ट दाखिल करने का भी निर्देश दिया था। जिस पर विभिन्न प्राधिकरणों ने आज सड़क चौड़ीकरण के लिए पेड़ काटने की एनजीटी से अनुमति मांगी थी।