सरकार और विभाग को सौंपी जिम्मेदारी
एनजीटी ने कार्यों की जिम्मेदारी भी सौंपी है। इसमें मुख्य काम शिक्षा मंत्रालय को सौंपा गया है। इसमें राज्यों को गाइडलाइंस देंने और फंडिंग का इंतजाम करने का आदेश है। साथ ही, हर तीन महीने में रिपोर्ट देनी होगी। इसके अलावा, पर्यावरण मंत्रालय को नए नियम बनाने और सीपीसीबी को गाइडलाइंस तैयार करने को कहा। स्वास्थ्य मंत्रालय को बीमारियों की जांच और जागरूकता प्रोग्राम चलाने के आदेश दिए गए हैं। राज्य सरकारों को लोकल लेवल पर सर्वे, हटाना और सजा का काम करने का काम सौंपा है और एक महीने में एक्शन प्लान बनाने के लिए कहा है।
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खुद ऑडिट नहीं करेंगे स्कूल प्रबंधन
वहीं, स्कूल प्रबंधनों को खुद ऑडिट न करने के लिए चेतावनी दी। ऐसा करने पर स्कूल बंद हो सकता है और जुर्माना भी लगेगा। एनजीटी ने कहा है कि मंत्रालय और सीपीसीबी अपनी कार्य योजना और नीतियों की रिपोर्ट छह महीने की अवधि समाप्त होने के एक महीने के भीतर अदालत को सौंपे। यदि रिपोर्ट नहीं दी गई तो महापंजीयक मामले को दोबारा न्यायपीठ के समक्ष रखेंगे।
श्रमिकों की सुरक्षा के लिए ये कदम उठाने होंगे
एनजीटी ने कहा है कि जिन जगहों पर एस्बेस्टस का उपयोग होता है, वहां श्रमिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके लिए ये कदम उठाने होंगे।
-कार्यस्थलों पर हवा में एस्बेस्टस के स्तर की निगरानी
-खतरे के संकेत और चेतावनी बोर्ड
-सुरक्षात्मक कपड़े और मास्क (पीपीई) का उपयोग
-स्वास्थ्य जांच व प्रशिक्षण को अनिवार्य किया गया
-एस्बेस्टस के संपर्क वाले क्षेत्रों में धूम्रपान, खाना या पानी पीना पूरी तरह प्रतिबंधित होगा।
क्या है मामला
बच्चों की सेहत से जुड़ा एक अहम मामला एनजीटी में पहुंचा था, जहां दिल्ली के स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर के एक अतिथि शिक्षक ने देशभर के स्कूलों में एस्बेस्टस सीमेंट की छतों पर रोक लगाने की मांग की थी। याचिकाकर्ता का दावा था कि ये छतें टूटने पर सूक्ष्म रेशे हवा में फैलाती हैं, जो बच्चों के फेफड़ों में जाकर कैंसर और गंभीर बीमारियां पैदा कर सकते हैं। उन्होंने 2022 के नेचर साइंटिफिक रिपोर्ट्स जर्नल के अध्ययन का हवाला दिया है, जिसमें कहा गया है कि एस्बेस्टस वाली इमारतों में धूल प्रदूषण बढ़ता है और बच्चों को ऐसी इमारतों से दूर रखा जाना चाहिए। साथ ही, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की चेतावनी का भी उल्लेख किया गया है कि सभी प्रकार के एस्बेस्टस फेफड़ों, स्वरयंत्र और अंडाशय के कैंसर के लिए जिम्मेदार हैं। याचिका में मांग की गई है कि सरकार स्कूलों से एस्बेस्टस छतों को चरणबद्ध तरीके से हटाने का आदेश जारी