एनजीटी यानि राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के अध्यक्ष जस्टिस स्वतंत्र कुमार आज अपने पद से सेवानिवृत्त हो गए। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश रहे जस्टिस स्वतंत्र कुमार ने जितनी सुर्खियां एनजीटी अध्यक्ष रहते बटोरी उतनी चर्चा उन्हें सुप्रीम कोर्ट के कार्यकाल के दौरान भी नहीं मिली।
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पर्यावरण संरक्षण के लिए जस्टिस स्वतंत्र कुमार ने कई ऐसे कड़े फैसले लिए जिससे वह पर्यावरण प्रेमियों के चहेते बन गए। स्वतंत्र कुमार की सबसे बड़ी उपलब्धि ये ही है कि 20 दिसंबर 2012 को उनके पद संभालने से पहले एनजीटी को शायद ही कोई गंभीरता से लेता हो लेकिन आज जब वह रिटायर हो रहे हैं तब एनजीटी का नाम पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली संस्थाओं और व्यक्तियों के लिए खौफ का पर्याय बन चुका है।
अपने कार्यकाल के दौरान स्वतंत्र कुमार ने बिना किसी भेदभाव के तमाम ऐसे कड़े फैसले लिए जिसका असर भी व्यापक हुआ और चर्चा भी। उन्होंने न सरकार को बख्शा न औद्योगिक घरानों को, न धर्मगुरुओं को न धार्मिक संस्थाओं को। इसी कड़ी में हाल ही में उनका अमरनाथ गुफा में जयकारे लगाने पर रोक वाला आदेश भी खासा चर्चित रहा।देश की आजादी के साल पैदा हुए स्वतंत्र कुमार ने अपने कॅरियर की शुरूआत दिल्ली बार काउंसिल में एक वकील के तौर पर की थी।
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इसके बाद वह 1994 में दिल्ली हाईकोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश बने, जहां से पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के बाद बांबे हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश बने। साल 2009 में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने उन्हें सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के तौर पर नियुक्त किया। जहां से रिटायर होने के बाद वह साल 2012 में एनजीटी के अध्यक्ष बने और उसमें ऊंचाइयों तक पहुंचाया। एनजीटी अध्यक्ष के तौर पर डालते हैं उनके पांच बड़े फैसलों पर एक निगाह।