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रिटायर हुए NGT का 'खौफ' पैदा करने वाले जस्टिस स्वतंत्र कुमार, इन पांच फैसलों से हुए प्रसिद्ध

Tue, 19 Dec 2017 02:40 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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एनजीटी यानि राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के अध्यक्ष जस्टिस स्वतंत्र कुमार आज अपने पद से सेवानिवृत्त हो गए। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश रहे जस्टिस स्वतंत्र कुमार ने जितनी सुर्खियां एनजीटी अध्यक्ष रहते बटोरी उतनी चर्चा उन्हें सुप्रीम कोर्ट के कार्यकाल के दौरान भी नहीं मिली।
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पर्यावरण संरक्षण के लिए ‌जस्टिस स्वतंत्र कुमार ने कई ऐसे कड़े फैसले लिए जिससे वह पर्यावरण प्रेमियों के चहेते बन गए। स्वतंत्र कुमार की सबसे बड़ी उपलब्धि ये ही है कि 20 दिसंबर 2012 को उनके पद संभालने से पहले एनजीटी को शायद ही कोई गंभीरता से लेता हो लेकिन आज जब वह रिटायर हो रहे हैं तब एनजीटी का नाम पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली संस्‍थाओं और व्यक्तियों के लिए खौफ का पर्याय बन चुका है।

अपने कार्यकाल के दौरान स्‍वतंत्र कुमार ने बिना किसी भेदभाव के तमाम ऐसे कड़े फैसले लिए जिसका असर भी व्यापक हुआ और चर्चा भी। उन्होंने न सरकार को बख्‍शा न औद्योगिक घरानों को, न धर्मगुरुओं को न धार्मिक संस्‍थाओं को। इसी कड़ी में हाल ही में उनका अमरनाथ गुफा में जयकारे लगाने पर रोक वाला आदेश भी खासा चर्चित रहा।देश की आजादी के साल पैदा हुए स्वतंत्र कुमार ने अपने कॅरियर की शुरूआत दिल्‍ली बार काउंसिल में एक वकील के तौर पर की थी।
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इसके बाद वह 1994 में दिल्‍ली हाईकोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश बने, जहां से पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के बाद बांबे हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश बने। साल 2009 में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने उन्हें सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के तौर पर नियुक्त किया। जहां से रिटायर होने के बाद वह साल 2012 में एनजीटी के अध्यक्ष बने और उसमें ऊंचाइयों तक पहुंचाया। एनजीटी अध्यक्ष के तौर पर डालते हैं उनके पांच बड़े फैसलों पर एक निगाह।
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इन पांच बड़े मुद्दों से मिली दुनियाभर में चर्चा

-‌एनजीटी को सबसे ज्यादा चर्चा तब मिली जब उसने दिल्‍ली में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए दिल्‍ली एनसीआर में दस साल से ज्यादा की डीजल और 15 साल से ज्यादा की पेट्रोल गाड़ियों के परिवहन पर प्रतिबंध लगा दिया। एनजीटी के इस निर्णय पर केंद्र सरकार ने भी राहत की अपील की लेकिन ट्रिब्यूनल ने किसी को कोई राहत नहीं दी।

- इसके बाद एनजीटी उस समय भी चर्चाओं में आ गया जब उसने आर्ट ऑफ लिविंग की ओर से दिल्‍ली में यमुना किनारे हुए आयोजन के बाद प्रदूषण फैलाने के आरोप में उसके खिलाफ 5 करोड़ का जुर्माना लगा दिया। इस मामले में आर्ट ऑफ लिविंग को हाईकोर्ट से भी राहत नहीं मिल सकी। खास बात ये रही कि श्रीश्री रविशंकर इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी, पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी समेत तमाम बड़ी हस्तियों ने शिरकत की थी।

-कचरा प्रबंधन में असफल रहने पर एनजीटी ने दिल्‍ली के चार रेलवे स्टेशनों आनंद विहार, विवेक विहार, शाहदरा और शकूरबस्ती रेलवे स्टेशन पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया। जुर्माने की ये रकम बेशक छोटी हो लेकिन सरकारी संस्‍थाओं के खिलाफ ये कड़ी कार्रवाई का संकेत जरूर है। 

-गंगा किनारे को नो डेवलेपमेंट जोन घोषित करना। एनजीटी ने स्‍वतंत्र कुमार की अध्यक्षता में ही गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए यह कड़ा फैसला सुनाया जिसमें गंगा के 100 मीटर के हिस्से को नो डेवलपमेंट जोन घोषित किया गया। इसके अलावा गंगा किनारे से 5 सौ मीटर की दूरी में कूडा निस्तारण पर भी रोक लगाते हुए 50 हजार के दंड का प्रावधान किया गया। 

-साल 2015 में एनजीटी ने फरीदाबाद के QRG सुपर स्पेशलिटी अस्पताल पर 12 करोड़ का जुर्माना लगाते हुए बाकी अस्पताल प्रबंधनों के होश उड़ा दिए। एनजीटी ने अस्पताल पर यह जुर्माना बिना परमिशन के निर्माण करने और तय मानक से ज्यादा निर्माण करने पर लगाया। 
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