राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने बुधवार को सरकार से सभी राज्यों के लिए एक एसओपी जारी करने को कहा है। इसमें निर्माण कार्य के लिए पर्यावरण क्लीयरेंस हासिल करने संबंधी नियमों को शामिल करना होगा। एनजीटी महाराष्ट्र के पुणे में गंगा एल्टस परियोजना में मिली मंजूरी को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
एनजीटी अध्यक्ष जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की पीठ ने तानाजी बी गांभिरे की याचिका पर अपने आदेश में कहा, हमारे पास कई ऐसे मामले आ रहे हैं जिनमें निर्माण परियोजनाओं को पर्यावरण मंजूरी देने में नियमों का उल्लंघन हो रहा है। अलग अलग राज्यों में संबंधित विभाग इसमें मनमानी कर रहे हैं जिसका असर पर्यावरण पर पड़ रहा है।
इसमें खासतौर पर महाराष्ट्र में राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण न तो इस तरह के निर्माणों को ध्वस्त करा रहा है और न ही इनसे उचित हर्जाना वसूल रहा है। एनजीटी ने कहा, बेहतर होगा की प्राधिकरण सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार अपनी कार्यप्रणाली की समीक्षा करे।
साथ ही पर्यावरण मंत्रालय भी नियमों के अनुपालन के लिए सभी राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरणों को एसओपी जारी करे। एनजीटी ने कहा, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नियमों के समन्वय एवं अनुपालन के लिए नोडल एजेंसी के रूप में काम करेंगे।