जाने माने निर्माता-अभिनेता अमोल पालेकर को बोलने से रोके जाने और उसके बाद सेंसरशिप वाले उनके आरोपों से परेशान नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट (एनजीएमए) ने उनके तमाम आरोपों को खारिज कर दिया है। एनजीएमए ने सफाई दी है कि उसने कोई भी एडवाइज़री कमेटी खत्म नहीं की है और न ही इसकी कोई योजना है। एनजीएमए के महानिदेशक अद्वैत गडनायक ने कहा है कि दिल्ली, मुंबई और बंगलुरु की एडवाइजरी कमेटी खत्म नहीं की गई है, बल्कि इनके कार्यकाल खत्म हो चुके हैं और नई कमेटी के गठन का काम चल रहा है। उन्होंने ये भी कहा कि किसी भी कलाकार की पहले से तय प्रदर्शनियां बाकायदा अपने वक्त पर आयोजित होंगी।
अमोल पालेकर को मुंबई में शनिवार को मशहूर कलाकार प्रभाकर बर्वे की प्रदर्शनी के उद्घाटन के दौरान एनजीएमए सदस्यों की टोकाटाकी की वजह से भाषण बीच में ही खत्म करना पड़ा था। नाराज अमोल पालेकर ने रविवार को प्रेस कांफ्रेंस करके संस्कृति मंत्रालय पर आरोप लगाया था कि वह कलाकारों पर सेंसरशिप लगा रही है। उन्होंने एनजीएमए के नियमों में बदलाव, एडवाइजरी कमेटी भंग करने और गैलरी का केवल छठवां हिस्सा नए कलाकारों की प्रदर्शनी के लिए देने के फैसले पर गंभीर सवाल उठाए थे।
कलाकारों को बोलने से रोकना उचित नहीं
एनजीएमए के महानिदेशक गडनायक ने अमर उजाला से कहा कि किसी कलाकार को बोलने से रोकना उचित नहीं है और उन्हें अपनी बात रखने का पूरा हक है। उन्होंने कहा कि वो अमोल पालेकर का पूरा सम्मान करते हैं लेकिन उन्हें गलत जानकारी दी गई है कि एनजीएमए ने एडवाइजरी कमेटी भंग कर दी है या मार्च और नवंबर में प्रस्तावित दो कलाकारों की प्रदर्शनी को खारिज कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि एडवाइजरी कमेटी ने दिसंबर 2019 तक के लिए जितने भी प्रस्ताव पास किए हैं और प्रदर्शनियों को मंजूरी दी है, वो बाकायदा तय वक्त पर ही होंगी।
एनजीएमए को आम आदमी के लिए खोला
एनजीएमए में नए कलाकारों को प्रदर्शनी के लिए कम जगह दिए जाने और अपने कलेक्शन को ही ज्यादा से ज्यादा जगह में प्रदर्शित करने के बारे में एनजीएमए महानिदेशक का कहना है कि पहले हम अपने कलेक्शन में से चुने हुए कलाकारों की प्रदर्शनी को दो साल के लिए गैलरी में प्रदर्शित करते थे, लेकिन कई कलाकारों ने इस बारे में अपने अपने सुझाव दिए हैं और कलाकारों को ज्यादा जगह दिए जाने के प्रस्ताव भी आए हैं, इस बारे में अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है। लेकिन एनजीएमए लगातार ज्यादा से ज्यादा कलाकारों को साथ जोड़ने और संस्था को आम आदमी से जोड़ने की दिशा में काम कर रहा है।
अद्वैत गडनायक का कहना है कि पिछले दो सालों में उनकी कोशिश रही है कि एनजीएमए को उसकी पुरानी गरिमा लौटाई जाए और इसकी बेहतरीन इमारत जयपुर हाउस को आम लोगों से जोड़ा जाए। इसके साथ ही मुंबई और बंगलुरु के अलावा देश के अन्य हिस्सों में भी एनजीएमए के कामकाज को ले जाया जाए।