भारत ने संगठित मानव तस्करों तथा आतंकवादी समूहों के बीच अवैध वित्तीय संबंधों के जरिये बने गठजोड़ को खतरनाक बताते हुए मंगलवार को कहा कि इसे आतंकरोधी वित्तीय प्रावधानों तथा प्रतिबंधों के जरिये तत्काल रोका जाना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र में भारत के सहायक स्थायी प्रतिनिधि तन्मय लाल ने सुरक्षा परिषद में ट्रैफिकिंग इन पर्सन्स इन कंफ्लिक्ट सिचुएशंस पर बहस के दौरान यह बात कही।
लाल ने कहा कि अनेक देशों में मानव तस्करी के मामलों में सजा देने की दर कम है जिसे बदलने की जरूरत है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि मानव तस्करी विशेषकर महिलाओं, बच्चों और शरणार्थियों की यौन दासता और बंधुआ मजदूरी या लड़ाका बनाने के लिए तस्करी को सशस्त्र संघर्ष से उर्वर जमीन मिलती है। उन्होंने कहा कि हालिया समय में इस्लामिक स्टेट और बोको हरम जैसे आतंकवादी संगठन सशस्त्र संघर्ष की दशा में महिलाओं और बच्चों क ो निशाना बनाकर जघन्य अपराध किये हैं।
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने मानव तस्करी के शिकार लोगों की दुर्दशा का जिक्र करते हुए पीड़ितों को न्याय और दोषियों को सजा देने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने मानवाधिकार और स्थिरता की भूमिका पर भी प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि यदि संघर्ष से मानव तस्करों को ऑक्सीजन मिलता है तो मानवाधिकार और स्थिरता से उन्हें घुटन होती है। उन्होंने सदस्य देशों को शुरुआती कदम तथा बचाव की कूटनीति में मदद करने की संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि युद्ध समाप्त करने, संघर्ष टालने और शांति बहाल करने के लिए रणनीतिक नेतृत्व की जरूरत है।