कश्मीर मसले के समाधान के लिए केंद्र सरकार की ओर से नियुक्त वार्ताकार और पूर्व आईबी प्रमुख दिनेश्वर शर्मा ने कहा कि वह अगले हफ्ते कश्मीर जाएंगे और तय करेंगे कि किन-किन पक्षों से बात करनी है। उन्होंने कहा कि वहां के हालात जानने के बाद ही वह वार्ता प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगे।
हालांकि एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर के मसले पर उन सभी लोगों से बात की जा सकती है जो देश के नागरिक और कश्मीर के हितधारक हैं। उन्होंने कहा, ‘कश्मीर पर नई पहल से मोदी सरकार अंतरराष्ट्रीय समुदाय को बता सकती है कि भारत ने कश्मीरियों के साथ बातचीत की प्रक्रिया शुरू कर दी है।’
शर्मा ने कहा कि पाकिस्तान की फंडिंग से कश्मीर के भटके हुए नौजवानों का भला होने वाला नहीं है। जल्द ही उन्हें समझ में आ जाएगा कि विदेशी फंडिंग से उनका या कश्मीर का विकास नहीं हो सकता है।
युवाओं को वहां की असली समस्याओं से रूबरू कराया जाएगा और इनसे निपटने पर काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश जम्मू कश्मीर में शांति बहाली पर रहेगी। नौजवानों को रोजगार दिलाना और भटके हुए युवाओं को सही रास्ते पर लाना ही हमारी प्राथमिकता होगी।
पाकिस्तान की टेरर फंडिंग पर शर्मा ने कहा कि एनआईए इस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है। हम चाहते हैं कि पाकिस्तान के इशारे पर काम करने वालों को समझाया जाएगा कि यह उनके हित में नहीं है। हम कश्मीर में विकास के सभी विकल्प खोलना चाहते हैं।