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Chandrayaan: पूर्व वैज्ञानिक बोले- लैंडर कैसा काम कर रहा इसकी होगी जांच, चंद्रमा पर सुरक्षित लैंडिंग सबसे अहम

Fri, 18 Aug 2023 01:21 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

चंद्रयान-1 के परियोजना निदेशक एम अन्नादुरई ने बताया कि लैंडर मॉड्यूल का अलग होना बड़ा मौका है। अब हमें पता चलेगा कि लैंडर कैसा काम कर रहा है। लैंडर अब प्रमाणित होगा और इसकी जांच की जाएगी। जिसके बाद इसे धीरे धीरे चांद के करीब लाया जाएगा।
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चंद्रयान-3 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आज का दिन भारत के मिशन चंद्रयान-3 के लिए अच्छा रहा। इसरो की पूर्व निर्धारित योजना के मुताबिक आज चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर मॉड्यूल को प्रोपल्शन मॉड्यूल से सफलतापूर्वक अलग हो गए। जिसके बाद इसरो के पूर्व वैज्ञानिक  मायलस्वामी अन्नादुरई ने कहा कि लैंडर की अब अंतिम और महत्वपूर्ण बात चंद्रमा पर इसकी सुरक्षित लैंडिंग है। उन्होंने कहा कि अब हमें पता चलेगा कि लैंडर कैसा काम कर रहा है। लैंडर अब प्रमाणित होगा और इसकी जांच की जाएगी। 

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बता दें कि चंद्रयान-3 मिशन के तहत यदि लैंडर विक्रम दक्षिण ध्रुव पर उतरने में सफल हुआ तो भारत चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग में महारथ वाला चौथा देश जाएगा। अब तक यह कारनामा सिर्फ अमेरिका, चीन और सोवियत संघ कर सके हैं।
लैंडर की नियमित जांच के साथ उसे चांद के करीब लाया जाएगा।

पूर्व वैज्ञानिक और चंद्रयान-1 के परियोजना निदेशक एम अन्नादुरई ने बताया कि लैंडर मॉड्यूल का अलग होना बड़ा मौका है। अब हमें पता चलेगा कि लैंडर कैसा काम कर रहा है। लैंडर अब प्रमाणित होगा और इसकी जांच की जाएगी। जिसके बाद इसे धीरे धीरे चांद के करीब लाया जाएगा। फिर इसे आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे ताकि यह 23 अगस्त को लक्षित स्थान तक जाने और सुरक्षित लैंडिंग करने के लिए सिग्नल ले ले। उन्होंने कहा कि सभी गतिविधियां लैंडर द्वारा की जाएंगी। उन्होंने कहा, यह शुरुआत है और आगे के सभी पड़ावों को बहुत सावधानी से देखना होगा। लैंडर आज से ही अपनी वास्तविक कार्रवाई शुरू करेगा।
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 बता दें कि चंद्रयान-3 का लैंडर विक्रम चांद के दक्षिणी ध्रुव की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग में सक्षम है और वह वहां रोवर प्रज्ञान को उतारेगा जो चांद की सतह पर भ्रमण कर रासायनिक अध्ययन करेगा और इसरो को जानकारी भेजेगा। लैंडर और रोवर के पास चांद की सतह पर विभिन्न प्रयोग करने के लिए वैज्ञानिक पेलोड हैं।

पहली बार ध्रुवीय क्षेत्र में उतरेगा लैंडर विक्रम
चंद्रमा के ध्रुवीय क्षेत्र पर्यावरण और उनकी ओर से पेश की जाने वाली कठिनाइयों के कारण बहुत अलग भूभाग है और इसलिए अब तक अज्ञात बना हुआ है। चंद्रमा पर पहुंचने वाले पिछले सभी लैंडर भूमध्यरेखीय क्षेत्र में, चंद्र भूमध्य रेखा के उत्तर या दक्षिण में कुछ डिग्री अक्षांश पर उतरे थे। ऐसे में ध्रुवीय क्षेत्र में उतरने वाला चंद्रयान-3 पहला होगा। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र का पता इस लिए भी लगाया जा रहा है क्योंकि इसके आसपास स्थायी रूप से छाया वाले क्षेत्रों में पानी की मौजूदगी की संभावना हो सकती है।


 इस तरह पहुंचा चांद के पास
14 जुलाई को श्रीहरिकोटा से रवाना होने के बाद चंद्रयान-3 ने तीन हफ्तों में कई चरणों को पार किया। पांच अगस्त को पहली बार चांद की कक्षा में दाखिल हुआ था। इसके बाद 6, 9 और 14 अगस्त को चंद्रयान-3 ने अलग-अलग चरण में प्रवेश किया। इसरो ने इन तीन हफ्तों में चंद्रयान-3 को पृथ्वी से बहुत दूर स्थित कक्षाओं में स्थापित किया।

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