'भारत अब विश्वगुरु नहीं', मुरली मनोहर जोशी ने क्वांटम कंप्यूटिंग में संस्कृत के उपयोग की पैरवी की
भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने संस्कृत के व्यापक प्रचार-प्रसार और आधुनिक तकनीक, खासकर क्वांटम कंप्यूटिंग में इसके उपयोग की वकालत करते हुए कहा कि भारत अब 'विश्वगुरु' (वैश्विक शिक्षक) नहीं रहा है और इस शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
सोमवार को एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत में जोशी ने संस्कृत को भारत की राजभाषा बनाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अतीत में भीमराव आंबेडकर समेत कई प्रमुख नेताओं ने संस्कृत को राजभाषा बनाने के प्रयास किए थे, लेकिन उन प्रस्तावों को स्वीकृति नहीं मिल सकी।
जोशी यह बातें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ी संस्था संस्कृत भारती के केंद्रीय कार्यालय के उद्घाटन के अवसर पर कह रहे थे। उन्होंने कहा कि संस्कृत न केवल भारत की सांस्कृतिक धरोहर है, बल्कि भविष्य की तकनीकों में भी इसकी उपयोगिता साबित हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि देश को अपनी बौद्धिक और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने के लिए संस्कृत के अध्ययन और उपयोग को बढ़ावा देना चाहिए।