केरल सरकार ने एडीजीपी के खिलाफ विजिलेंस जांच का फैसला किया
केरल सरकार ने वरिष्ठ आईपीसी अधिकारी एम. आर. अजित कुमार पर अवैध संपत्ति जमा करने के लगे आरोपों पर विजिलेंस जांच करने का फैसला लिया है। सूत्रों के मुताबिक, एडीजीपी (कानून-व्यवस्था) अजित कुमार के खिलाफ आरोप जब सामने आए, तो वाम सरकार ने खुद ही विजिलेंस जांच फैसला लिया। हालांकि, सरकार ने अभी तक इस फैसले की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। अजित कुमार ने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की। वाम विधायक पी.वी. अनवर ने हाल ही में उन पर न केवल अवैध संपत्ति जमा करने का आरोप लगाया था, बल्कि उन्हें मुख्यमंत्री पिनरई विजयन के भरोसे को तोड़ने और अपनी दायित्वों की अनदेखी करने का भी जिम्मेदार ठहराया था।
पश्चिम बंगाल : सरकारी मेडिकल कॉलेज ने 40 छात्रों को छह माह के लिए किया 'निष्कासित'
कल्याणी स्थित सरकारी कॉलेज ऑफ मेडिसिन और जेएनएम अस्पताल ने अन्य छात्रों को धमकाने के आरोप में 40 छात्रों को छह महीने के लिए निष्कासित कर दिया है। यह फैसला कॉलेज परिषद की बैठक में लिया गया। इन छात्रों को कॉलेज में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। हालांकि, ये छात्र परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा एंटी-रैगिंग समिति और आंतरिक शिकायत समिति या किसी विशेष जांच समिति के आगे की जांच का सामना करने की इन्हें अनुमति दी जाएगी। बैठक में सर्वसम्मति से यह भी निर्णय लिया गया कि अगली सूचना तक या लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित छात्र संगठन के गठन तक छात्र कल्याण समिति को भंग कर दिया जाएगा।
ओडिशा में महिला ने पुलिस पर लगाया उत्पीड़न का आरोप
ओडिशा के भुवनेश्वर में सेना के अधिकारी की एक महिला मित्र ने आरोप लगाया है कि पुलिस हिरासत में उसका यौन उत्पीड़न किया गया। महिला ने बताया कि वह रविवार की रात अपने मित्र के साथ घर लौट रही थीं, तभी कुछ युवकों ने उनके साथ बदसलूकी की।
महिला ने यह भी आरोप लगाया कि जब वह मदद और प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए भरतपुर पुलिस थाने का गईं, तो वहां एक महिला कांस्टेबल ने उनकी मदद करने के बजाय उन्हें अपशब्द कहे। महिला अभी एम्स-भुवनेश्वर में इलाज करा रही हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस ने उनके मित्र को लॉक में डाला। जब उन्होंने विरोध किया तो दो महिला पुलिसकर्मियों ने उन पर हमला किया। बाद में एक पुरुष अधिकारी ने उनके साथ बुरा व्यवहा किया और अपमानजनक टिप्पणी की।
राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस घटना का संज्ञान लिया है और पुलिस महानिदेशक से तीन दिन में कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। इस बीच, चांदका पुलिस थाने में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, जिन्होंने सेना के अधिकारी और महिला के साथ बदसलूकी की।
असम सीएम का दावा- चार बांग्लादेशी घुसपैठियों को वापस भेजा गया
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि करीमगंज जिले में अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास से चार बांग्लादेशियों को असम पुलिस ने खदेड़ दिया। इस महीने अब तक लगभग 25 घुसपैठियों को असम से बांग्लादेश वापस भेजा गया है।
मुख्यमंत्री ने गुरुवार शाम सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा, 'भारत-बांग्लादेश सीमा पर कड़ी निगरानी रखते हुए असम की पुलिस ने करीमगंज में सीमा के पास चार बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान की है। उनकी पहचान रोमिदा बेगम, अब्दुल इलाही, मरिजना बेगम और अब्दुल सुक्कुर के रूप में की गई। उन्हें तुरंत सीमा पार बांग्लादेश वापस भेज दिया गया। गुड जॉब टीम!'
पड़ोसी देश में राजनीतिक अशांति की शुरुआत के बाद से इस महीने लगभग 25 बांग्लादेशियों को वापस भेज दिया गया है, जबकि लगभग 50 को अगस्त के अंत तक वापस भेज दिया गया है।
सरमा ने पहले कहा था कि अवैध प्रवासी कपड़ा उद्योग में काम करने के लिए दक्षिणी शहरों तक पहुंचने के लिए असम का उपयोग कर रहे थे। बांग्लादेश में अशांति के बाद बीएसएफ ने पूर्वोत्तर में 1,885 किलोमीटर लंबी भारत-बांग्लादेश सीमा पर चौकसी बढ़ा दी है। असम के पुलिस महानिदेशक जीपी सिंह ने कहा था कि राज्य पुलिस बल भी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर हाई अलर्ट बनाए हुए है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी व्यक्ति अवैध रूप से राज्य में प्रवेश न कर सके।
ओडिशा में वन अधिकारी का शव सरकारी क्वार्टर में लटका मिला
ओडिशा के कालाहांडी जिले के भवानीपटना में एक वन अधिकारी का शव उसके सरकारी क्वार्टर में लटका मिला। पुलिस ने बताया कि मृतक वन अधिकारी रायगढ़ जिले के निवासी संजय कुमार नायक थे और वह भवानीपटना में तैनात थे।
रायगढ़ के सहायक वन संरक्षक तपस कुमार बेहरा ने कहा, 'हमें बुधवार सुबह करीब आठ बजे सूचना मिली कि नायक का शव भवानीपटना स्थित उनके सरकारी क्वार्टर में फंदे से लटका हुआ मिला है। हमने घटनास्थल पर गए और उनके परिवार को भी जानकारी दी। पोस्टमार्टम के बाद, शव को उसके परिवार को सौंप दिया गया है।'
मृतक की पत्नी प्रियंका सुबुद्धि ने आरोप लगाया कि उनके पति को उनके शीर्ष अधिकारियों द्वारा दी गई मानसिक यातना के कारण आत्महत्या करने के लिए मजबूर होना पड़ा। मृतक के भाई ने भी नायक के उच्च अधिकारी के खिलाफ इसी तरह के आरोप लगाए और संबंधित वन अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।