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Updates: गुवाहाटी में कार-ट्रक टक्कर से 3 महिलाओं की मौत; चारमीनार एक्सप्रेस में धुआं-चिंगारी से ट्रेन रोकी गई

Sun, 26 Apr 2026 03:02 PM IST
Devesh Tripathi न्यूज डेस्क, अमर उजाला
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आज की बड़ी खबरें। - फोटो : अमर उजाला
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि सार्थक समाज कल्याण के लिए ज्ञान और कर्म के साथ भक्ति का एकीकरण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने इस संगम को 'त्रिवेणी' की संज्ञा दी, जो समाज के उत्थान के लिए महत्वपूर्ण है।
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नागपुर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) विदर्भ प्रांत द्वारा यशवंतराव केलकर की जन्मशताब्दी के उपलक्ष्य में आयोजित "प्रिय यशवंतराव" कार्यक्रम में बोलते हुए भागवत ने इस बात पर जोर दिया कि भक्ति के आधार के बिना ज्ञान विनाशकारी हो सकता है और कर्म अव्यवस्थित हो सकता है। उन्होंने कहा कि भक्ति, शक्ति और ज्ञान दोनों को दिशा और बल प्रदान करती है।

भागवत ने स्पष्ट किया, "भक्ति के बिना ज्ञान उपयोगी नहीं है, यह शरारती हो जाता है। भक्ति के बिना कर्म में व्यवस्था नहीं होती।" उन्होंने समझाया कि भक्ति ही मनुष्य के श्रम के अंतिम उद्देश्य को निर्धारित करती है, यह सुनिश्चित करती है कि प्रयास स्वार्थी या अराजक उद्देश्यों के बजाय 'लोक संग्रह' यानी समाज के व्यापक हित की ओर निर्देशित हों।
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चारमीनार एक्सप्रेस में धुआं और चिंगारी से मचा हड़कंप

तेलंगाना के यादाद्री भुवनगिरी जिले में चारमीनार एक्सप्रेस के एक कोच से धुआं और चिंगारी निकलने की घटना सामने आई, जिसके बाद ट्रेन को तुरंत एक स्टेशन पर रोक दिया गया। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह घटना कोच के पहिये में ब्रेक बाइंडिंग के कारण हुई थी। जैसे ही धुआं और चिंगारी दिखाई दी, रेलवे स्टाफ ने तुरंत स्थिति पर काबू पा लिया।

दक्षिण मध्य रेलवे (SCR) ने बताया कि ट्रेन संख्या 12760 हैदराबाद से तांबरम जा रही चारमीनार एक्सप्रेस को सिकंदराबाद डिवीजन के अलेर रेलवे स्टेशन पर शाम 7:47 बजे रोका गया था। रेलवे के मुताबिक, इस घटना में किसी तरह का नुकसान या कोई हताहत नहीं हुआ। स्थिति सामान्य होने के बाद ट्रेन को रात 8:10 बजे अपने गंतव्य के लिए रवाना कर दिया गया। रेलवे ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि कोच एस-5 के पहिये से धुआं और चिंगारी निकलने की जानकारी मिलते ही तुरंत कार्रवाई की गई और आग जैसी स्थिति को तुरंत बुझा दिया गया।

गुवाहाटी में खड़े ट्रक से टकराई कार, तीन महिलाओं की मौत

असम की राजधानी गुवाहाटी में रविवार तड़के एक भीषण सड़क हादसा हो गया, जिसमें तीन महिलाओं की दर्दनाक मौत हो गई। यह हादसा मठघरिया इलाके में हुआ, जब एक तेज रफ्तार कार खड़ी ट्रक से टकरा गई और फिर डिवाइडर से जा भिड़ी।

पुलिस के अनुसार, कार पहले सड़क किनारे खड़ी ट्रक से टकराई और टक्कर के बाद अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई। हादसा इतना भयानक था कि कार में सवार तीनों महिलाएं गंभीर रूप से घायल हो गईं। घायलों को तुरंत गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने दो महिलाओं को मृत घोषित कर दिया, जबकि तीसरी ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। मृतकों की पहचान आकांक्षा सैकिया (सोनारी), पूजा साहा (गोलपाड़ा) और नेहा खान (बरपेटा) के रूप में हुई है। तीनों महिलाएं गुवाहाटी में किराए के मकान में रह रही थीं।

पुलिस ने हादसे में शामिल ट्रक को जब्त कर लिया है। शुरुआती जांच में पता चला है कि कार धेमाजी के एक व्यक्ति के नाम पर पंजीकृत थी, जिसे ट्रैवल एजेंसी को किराए पर दिया गया था। पुलिस ने बताया कि वे कार चालक की तलाश कर रहे हैं और मामले की जांच जारी है।

भद्रक में बीजेडी को बड़ा झटका, पूर्व सांसद मंजुलता मंडल और पूर्व विधायक ने छोड़ी पार्टी
ओडिशा के भद्रक लोकसभा क्षेत्र में बीजू जनता दल को बड़ा झटका लगा है। पूर्व सांसद मंजुलता मंडल और उनके पति व पूर्व विधायक मुक्तिकांत मंडल ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इनके साथ पूर्व जिला अध्यक्ष जगन्नाथ स्वाइन और कई अन्य स्थानीय नेताओं ने भी पार्टी छोड़ दी है। 

छह अप्रैल को बीजेडी अध्यक्ष नवीन पटनायक ने कथित दल-विरोधी गतिविधियों के कारण मंडल दंपती को पार्टी से निलंबित कर दिया था। इस्तीफे के बाद आयोजित एक बैठक में मुक्तिकांत मंडल ने आरोप लगाया कि पार्टी के लिए वर्षों समर्पित रहने के बावजूद उन्हें कुछ स्वार्थी तत्वों की साजिश के तहत असंविधानिक रूप से निलंबित किया गया। उन्होंने चेतावनी दी कि इस निर्णय से जिले में पार्टी का पतन हो सकता है। दूसरी ओर, बीजेडी के उपाध्यक्ष प्रफुल्ल सामल ने कहा कि किसी नेता के पार्टी छोड़ने का मतलब यह नहीं है कि जनता का समर्थन भी उनके साथ चला गया है।
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बेमौसम बारिश-ओलावृष्टि से नुकसान के बाद भी देश में गेहूं की मजबूत पैदावार
बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से हुए नुकसान के बावजूद फसल वर्ष 2025-26 में देश में गेहूं की पैदावार स्थिर और मजबूत है। कृषि मंत्रालय ने रविवार को कहा, चुनौतियों के बावजूद किसानों ने बेहतर उपायों के दम पर 12.02 करोड़ टन गेहूं उत्पादन का अनुमान है। हालांकि, एक उद्योग संगठन रोलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (आरएफएफआई) ने सरकार के पहले के अनुमान से कम उत्पादन का आकलन किया है।

आरएफएफआई ने 24 अप्रैल के अनुमान में कहा, फसल वर्ष 2025-26 (जुलाई-जून) में गेहूं उत्पादन 11.06 करोड़ टन रहेगा। यह 2024-25 के 10.96 करोड़ टन से अधिक है। इस अनुमान में हालिया मौसमी नुकसान को भी शामिल किया गया है। उद्योग संगठन का यह अनुमान सरकार के पूर्व के 12.02 करोड़ टन के आकलन से काफी कम है। एक  वर्ष पहले की समान अवधि में 11.79 करोड़ टन गेहूं उत्पादन हुआ था। खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने कहा, उद्योग संगठन ने 11 करोड़ टन, जबकि कृषि मंत्रालय का पूर्व अनुमान 12 करोड़ टन उत्पादन था। वास्तविक उत्पादन इनके बीच रहेगा।

अग्रिम जमानत रद्द करते हुए सरेंडर का आदेश नहीं दे सकती अदालत
सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में कहा कि अग्रिम जमानत की याचिका खारिज करते हुए कोई भी कोर्ट आरोपी को आत्मसमर्पण करने का निर्देश नहीं दे सकती। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने यह टिप्पणी झारखंड हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर की, जिसमें आरोपी की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज करते हुए उसे ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण करने व नियमित जमानत लेने के लिए कहा गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालत के पास यह अधिकार नहीं है कि वह आरोपी को आत्मसमर्पण करने के लिए बाध्य करे। अगर अदालत अग्रिम जमानत खारिज करना चाहती है तो वह ऐसा कर सकती है। मामला 2021 में दर्ज जमीन विवाद से जुड़ा था, जिसमें आरोपी पर धोखाधड़ी, जालसाजी और मारपीट जैसे आरोप लगाए गए हैं। शीर्ष   कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब मजिस्ट्रेट  मामले का संज्ञान लेता है, तो सामान्य प्रक्रिया के तहत समन जारी किया जाता है और आरोपी को अदालत में पेश होकर कार्यवाही में भाग लेना होता है।

संसदीय समिति हैरान, एनएमसी ने विधि मंत्रालय की मंजूरी के बिना जारी किए नियम
एक संसदीय समिति ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के विधि मंत्रालय की आवश्यक मंजूरी के बिना नियम और विनियम जारी करने पर गंभीर आपत्ति जताई है। समिति ने कहा कि वह यह जानकर हैरान रह गई कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की ओर से जारी महत्वपूर्ण नियमों की जांच विधि मंत्रालय ने नहीं की थी, जबकि यह भविष्य की कमियों को रोकने के लिए एक अनिवार्य शर्त है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम के तहत बनाए गए नियमों में कमियों पर अपनी रिपोर्ट में, अधीनस्थ विधान पर लोकसभा समिति ने कहा कि मसौदा नियमों और विनियमों की कानूनी, सांविधानिक और प्रारूपण के दृष्टिकोण से विधि मंत्रालय से जांच करवाना अनिवार्य है।

समिति ने कहा कि स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तत्वावधान में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) से प्रकाशित नियमों की जांच के दौरान, समिति को यह देखकर आश्चर्य हुआ कि किसी भी अधीनस्थ कानून को बनाने की सबसे जरूरी प्रक्रियाओं में से एक यानी सांविधानिक, कानूनी और मसौदा तैयार करने के दृष्टिकोण से उसे विधि और न्याय मंत्रालय से जांच करवाना छूट गया था। यह रिपोर्ट संसद के हाल ही में संपन्न बजट सत्र में पेश की गई थी। समिति की रिपोर्ट, एनएमसी के तैयार किए गए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (चिकित्सा योग्यताओं की मान्यता) विनियम, 2023, चिकित्सा संस्थानों में शिक्षकों की पात्रता योग्यता विनियम, 2022 और चिकित्सा संस्थान (संकाय की योग्यताएं) विनियम, 2025 की जांच पर आधारित है। संसदीय समिति ने कहा कि ऐसी घटनाओं को देखकर वह हैरान रह गई, जिनमें विधि मंत्रालय को जानकारी में नहीं रखा गया था। रिपोर्ट में कहा गया कि विधेयकों, अधिनियमों, नियमों और विनियमों को विधि मंत्रालय से विधिवत जांच करवाना एक अपरिहार्य कदम है, जिसे छोड़ा नहीं जाना चाहिए। इस कमी को स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के प्रतिनिधियों ने भी समिति के समक्ष अपनी गवाही के दौरान स्पष्ट रूप से स्वीकार किया था।
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