कर्नाटक में घर से मतदान करने के बाद 85 वर्षीय पूर्व सैन्य अधिकारी की मौत
कर्नाटक के बंटवाल के वाग्गा निवासी 85 वर्षीय माधव प्रभु ने गंभीर बीमारी से जूझने के बाद भी अपने मतदान के कर्तव्य को निभाया। गंभीर बीमारी से जूझ रहे पूर्व सेना अधिकारी और मलेरिया उन्मूलन विभाग के निरीक्षक प्रभु को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बीमारी से जूझने के बाद भी प्रभु अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए दृढ़ थे। चुनाव आयोग द्वारा 85 वर्ष या इससे अधिक की उम्र के लोगों के लिए घर से मतदान की व्यवस्था की गई है। डॉक्टर की अनुमति लेने के बाद वो अपना वोट देने के लिए कुछ समय के लिए अस्पताल से घर चले गए। अस्पताल लौटने पर उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। अब उनके निधन की खबर सामने आई है। वे अपने पीछे अपनी पत्नी, दो बेटियों और बेटों को छोड़ गए।