ट्रक ड्राइवर की हत्या को हादसा सिद्ध करने की कोशिश करने पर एसपी ने इंस्पेक्टर भोगांव को निलंबित कर दिया। वहीं एक अन्य दरोगा को लाइन हाजिर किया है। बता दें कि पूरे मामले का अमर उजाला ने खुलासा किया था कि पुलिस ट्रक ड्राइवर के हत्यारोपियों का साथ दे रही है।
उसके बाद ही एसपी ने पूरे मामले की जांच एएसपी को सौंपी थी। वहीं उक्त मामले में पीड़ित परिवार की तहरीर पर चार युवकों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट थाना भोगांव में दर्ज हुई। 23 मई को दिल्ली के संगम विहार थाने की दलित बस्ती के मकान नंबर 224 ब्लॉक दो में रहने वाले ट्रक ड्राइवर सुखपाल पुत्र धनपत की मौत भोगांव थाना क्षेत्र में छाछा के पास स्थित ढाबे पर हो गई थी।
इस मामले में परिवारीजन पहले ही दिन से उनकी हत्या की बात कह रहे थे। वहीं इंस्पेक्टर भोगांव राजीव सिरोही और आईओ उदयवीर सिंह पूरे मामले को हादसे का रूप देने में जुटे रहे। इसकी शिकायत पीड़ित परिवार ने एसपी देवरंजन से की थी।
उन्होंने मामले की जांच एएसपी दिगंबर कुशवाह को सौंप दी। उनकी जांच में खुलासा हुआ कि इंस्पेक्टर और आईओ ने पूरे मामले को हत्यारोपियों का साथ देकर हादसे का रूप देने की कोशिश की है। इसके लिए इंस्पेक्टर ने ढाबा संचालक को धमकाकर ट्रक ड्राइवर की पहले हार्टअटैक से मौत और उसके बाद ढाबा के सामने हुए हादसे में मौत होने की तहरीर तक ले ली।
यह थी विवाद की वजह
ट्रक
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
इस पूरे मामले का खुलासा अमर उजाला ने 14 और 15 जून के अंक में खबर प्रकाशित कर किया था। खबर के आधार पर एएसपी ने ढाबा संचालक को बुलाकर कड़ाई से पूछताछ की तो पूरा मामला खुलता गया। जांच में पता चला कि इंस्पेक्टर भोगांव और आईओ ने हत्यारोपी चार युवकों भूपेंद्र उर्फ गुड्डा, नंदू सिंह निवासी महुआहार थाना भोगांव, आशीष कुमार निवासी नगलामान सिंह, संजीव निवासी नौरंगाबाद और अनिल कुमार निवासी कमलपुर थाना बेवर के साथ मिलकर हत्या को हादसे का रूप देने की कोशिश की थी।
इसके बाद एएसपी ने जांच रिपोर्ट एसपी को सौंप दी। एसपी देवरंजन ने रिपोर्ट के आधार पर इंस्पेक्टर भोगांव राजीव सिरोही को निलंबित कर दिया। वहीं आईओ उदयवीर सिंह को लाइन हाजिर कर दिया। एसपी देवरंजन ने बताया कि जांच में दोषी पाए जाने पर दोनों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
जांच जारी है अभी और लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। सुखपाल ट्रक चलाता था। खरीदे गए ट्रक की किस्त नहीं चुका पाया था। आरोपी चारों युवक छाछा स्थित ढाबे पर पहुंचे और खुद को फाइनेंस कंपनी का कर्मचारी बताकर सुखपाल से ट्रक छीनने की कोशिश की। विरोध करने पर उक्त लोगों ने सुखपाल की जमकर पिटाई की थी। इससे उसको गहरी चोटें आईं। पोस्टमार्टम में भी उसकी मौत का कारण पसलियां टूटने से होना बताया गया था।