महाराष्ट्र के भंडारा में 10 नवजात बच्चों की मौत
- फोटो : ANI
भंडारा जिला अस्पताल में आग की घटना को लेकर हैरान करने वाली बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि सिक न्यू बॉर्न केयर यूनिट में आधे घंटे तक शिशुओं का दम धुएं में घुटता रहा, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं था। बच्चों के इस वार्ड में स्मोक डिटेक्टर भी नहीं था।
इस घटना पर न सिर्फ बच्चों के परिजनों बल्कि आम जनता का भी गुस्सा भड़क उठा है। बच्चों की मौत से अस्पताल परिसर में कोहराम मचा रहा।
परिवारवालों का आरोप है कि यह सब कुछ अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के चलते हुआ है। अपने मृत बच्चों को देखने के लिए परिजन बिलखते रहे। उन्हें उनके बच्चों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी जा रही थी।
शनिवार सुबह तक अस्पताल परिसर पुलिस छावनी में तब्दील हो चुका था, जहां मीडिया तक का प्रवेश वर्जित था। डॉ. प्रमोद खंडाते के मुताबिक, नर्स ने शिशु केयर यूनिट का दरवाजा खोला तो पूरा वार्ड धुएं से भर हुआ था। वरिष्ठ अधिकारियों सहित डॉक्टर तुरंत मौके पर पहुंचे और पांच मिनट के अंतराल पर फायर ब्रिगेड भी आ गई। जिसके बाद शिशुओं को बचाने का कार्य शुरू कर दिया गया था।
अस्पताल पर लापरवाही का आरोप
लोगों का कहना है कि अस्पताल के सिक न्यू बॉर्न केयर यूनिट में रात के समय एक डॉक्टर और 4 से 5 नर्स की ड्यूटी रहती है। लेकिन जिस समय दरवाजा खोला गया, उस समय वहां कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था। धुएं के कारण बच्चों का शरीर काला पड़ गया था। कई परिजनों का आरोप है कि बीते 10 दिन से उन्हें अपने बच्चे से मिलने नहीं दिया गया है।