उपलब्धियों से भरे 2024 में भारत ने प्रोबा-3 और स्पैडेक्स मिशन लॉन्च करके अंतरिक्ष क्षेत्र में लंबी छलांग के साथ नए साल की उम्मीदों की मजबूत नींव रख दी है। भारत ने रक्षा, बुनियादी ढांचा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में पूरी दुनिया को अपनी क्षमताओं का लोहा मनवाया। नए क्षेत्रों में नए अवसर बढ़ने से भारत की धाक बढ़ी है। निमोनिया के लिए पहले स्वदेशी एंटीबायोटिक और कैंसर के उपचार के लिए नेक्सकार-19 के विकास जैसी उपलब्धियों ने फार्मास्युटिकल्स क्षेत्र में भी नई इबारत लिख दी है।
मिशन मौसम : आपदाओं से बचाएगी सटीक भविष्यवाणी
फार्मास्युटिकल्स क्षेत्र में नई दवाओं की खोज में मिली सफलता
भारत ने निमोनिया के लिए पहली स्वदेशी एंटीबायोटिक नैफिथ्रोमाइसिन को लॉन्च किया, जो बैक्टीरिया को मारती है और उसके प्रजनन को रोकती है। इसे प्रतिरोधी संक्रमणों का इलाज खोजने की दिशा में क्रांतिकारी उपलब्धि माना जा रहा है। 2025 से इसके वाणिज्यिक उत्पादन का लक्ष्य है।
आईटी : 10 लाख नौकरियां कर रहीं आपका इंतजार
आईटी क्षेत्र में नौकरियों में इस वर्ष 20 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी होने का अनुमान है। फर्स्टमेरिडियन बिजनेस सर्विसेज की रिपोर्ट के अनुसार, तेजी से डिजिटल परिवर्तन व उभरते प्रौद्योगिकी की वजह से आईटी क्षेत्र में पेवेशरों की मांग बढ़ रही है। सिर्फ जेनरेटिव-एआई उद्योग में 10 लाख से अधिक लोगों को अगले चार साल में नौकरी मिलेगी।
इनमें बढ़ेगी मांग
एप डेवलपर्स, सॉफ्टवेयर इंजीनियर, डेवऑप्स इंजीनियर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), मशीन लर्निंग और साइबर सुरक्षा, डाटा विश्लेषक, डाटा इंजीनियर, डाटा वैज्ञानिक।
रक्षा क्षेत्र : आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़े कदम
उदारीकृत एफडीआई व आत्मनिर्भरता की तरफ कदम बढ़ाते हुए भारत ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास में परिवर्तनकारी सुधारों के साथ स्वदेशी उत्पादन को रिकॉर्ड 1.27 लाख करोड़ तक पहुंचा दिया। वहीं, निर्यात में भी 30 गुना बढ़ोतरी हुई, जिसका लक्ष्य 50,000 करोड़ है।
बुनियादी ढांचा और उभरती प्रौद्योगिकी में बढ़ी ताकत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की निगरानी में प्रगति प्लेटफॉर्म के जरिये 205 अरब डॉलर (करीब 17,425 अरब रुपये) की 340 से अधिक परियोजनाओं को गति मिली और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की मंजूरी पर लगने वाले समय में कमी आई।
भारत ने अपना पहला हाइपरलूप टेस्ट ट्रैक आईआईटी मद्रास में पूरा किया और जीएनएसएस-सक्षम दूरी आधारित इलेक्ट्रॉनिक टोलिंग का संचालन किया। भारत इस तकनीक से दुनिया में कहीं भी लोगों को या वस्तुओं को तीव्रता के साथ सुरक्षित एवं कुशलतापूर्वक स्थानांतरित कर सकेगा।