कोविड-19 के 177 वैरिएंट ने देश में संक्रमण की रफ्तार बढ़ा दी है। महाराष्ट्र, गुजरात समेत देश के डेढ़ दर्जन से अधिक राज्यों से चिंताजनक संकेत मिल रहे हैं। 24 घंटे में 59118 नए मामले सामने आए हैं, लेकिन केन्द्र सरकार के रणनीतिकार 2021 में लॉकडाउन जैसी रणनीति पर सोचने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक अभी इस तरह के कोई संकेत नहीं हैं। केन्द्रीय गृह मंत्रालय कोविड-19 संक्रमण को लेकर सतर्क है, लेकिन लॉकडाउन, कर्फ्यू, कंटेंनमेंट जोन या माइक्रो कंटेनमेंट जोन जैसे विषय राज्यों के क्षेत्राधिकार पर निर्भर हैं। सूत्र बताते हैं कि अभी केन्द्र सरकार इस बारे में स्थितियों पर नजर रख रही है।
कोविड-19 संक्रमण को रोकने के लिए केन्द्र सरकार ने लॉकडाउन का अधिकार अपने हाथ में ले रखा था। बाद में राज्यों को इस बारे में निर्णय लेने का अधिकार दे दिया था। अभी राज्यों के स्तर पर ही रात्रि कर्फ्यू समेत तमाम निर्णय लिए जा रहे हैं। महाराष्ट्र, गुजरात, केरल, पंजाब समेत अन्य राज्य सरकारों ने इस बारे में कई एहतियाती कदम उठाए हैं। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, कर्नाटक समेत तमाम राज्य संक्रमण को लेकर सतर्क हैं। लेकिन अभी किसी भी राज्य ने बड़े पैमाने पर पाबंदी लगाने जैसा कदम नहीं उठाया है।
अमेरिका ने पिछले साल कोविड 19 संक्रमण के दौरान अपनी आर्थिक गतिविधियों को जारी रखा था। देश ने पूर्ण लॉकडाउन से परहेज किया था। हालांकि अमेरिका को इसके चलते जान-माल का बड़ा नुकसान हुआ था। अमेरिका की तुलना में भारत में न तो संक्रमण फैला और न ही उस तरह के भयावह हालात पैदा हुए। लेकिन रणनीतिकारों के लॉकडाउन को लेकर संशय से साफ लग रहा है कि केन्द्र सरकार इससे परहेज कर सकती है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों को भी अभी इसकी संभावना कम नजर आ रही है।
सूत्र बताते हैं कि उद्योग जगत की तरफ से लॉकडाउन न लगाने को लेकर बड़ा दबाव है। छोटे, मझोले और लघु उद्योगों की तरफ से भी आशंका जताई जा रही है कि इस साल यदि लॉकडाउन लगा और मजदूर, कामगार अपने घरों की तरफ लौटे, तो अर्थव्यवस्था को बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। देश में रोजगार की स्थिति पर काम करने वाले संजीव कुमार सिंह बताते हैं कि पिछले साल की पुनरावृत्ति दोहराए जाने पर मध्यवर्ग के जहां चरमराने का खतरा पैदा होगा, वहीं जुलाई महीने के बाद देश में बेरोजगारी का स्तर बहुत पीड़ादायी स्तर पर पहुंच जाएगा।
पिछले 24 घंटे में कोविड-19 संक्रमण के 59 हजार 118 नए मामले आए हैं। 24 घंटे के भीतर 257 लोग इसके संक्रमण में जान से हाथ धो बैठे हैं। महाराष्ट्र, पंजाब, केरल, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और गुजरात में इसकी स्थिति चिंताजनक स्तर पर पहुंच चुकी है। अभी तक देश में एक करोड़ 18 लाख लोग कोविड से संक्रमित हो चुके हैं। एक करोड़ 13 लाख लोग इससे स्वस्थ हुए और एक लाख 61 हजार लोगों की इस संक्रमण से मृत्यु हो चुकी है। अकेले दिल्ली में अब तक 6.63 लाख कोविड से संक्रमित हो चुके हैं। इनमें से 6.36 लाख लोग इससे ठीक हुए और 10 हजार 970 लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा। इस बार अभी तक ब्राजील, अफ्रीका, ब्रिटेन समेत 177 नए वैरिएंट की सूचना है।
आईसीएमआर के आंकड़ों पर गौर करें तो 60 साल से अधिक उम्र के केवल 20 फीसदी से कम लोगों को ही अभी कोविड-19 का टीका लगा है। 25 मार्च तक देश के 4 करोड़ 70 (जनसंख्या का 3.44 प्रतिशत) लोगों को टीके की पहली डोज लग चुकी है। 85 लाख (जनसंख्या का 0.62 फीसदी) से अधिक लोगों को टीके की दूसरी डोज भी लगी है। देश की जनसंख्या के लिहाज से यह आंकड़ा अभी ऊंट के मुंह में जीरा ही है।