केंद्र सरकार कोरोना संक्रमण पर जल्द से जल्द नियंत्रण पाने के लिए टीकाकरण नीति में फिर बदलाव की है। यह नई नीति आज से यानी 21 जून से लागू हो गई। इस नीति के तहत 18 साल से ज्यादा उम्र के सभी लोगों के लिए टीकों की खरीदी केंद्र सरकारें करेंगी । इससे पहले सिर्फ 45 साल या उससे ज्यादा उम्र के लोगों और हेल्थ केयर वर्कर्स और फ्रंट लाइन वर्कर्स के लिए ही केंद्र सरकार की तरफ से मुफ्त वैक्सीन मुहैया कराई जा रही थी।
18 साल से ज्यादा उम्र के सभी नागरिकों को केंद्र और राज्य सरकारों के जरिए मुफ्त टीका दिया जाएगा ।
निजी अस्पतालों में वैक्सीन के लिए अब जेब ढीली करनी पडे़गी। हालांकि, अब निजी अस्पताल पहले की तरह वैक्सीन के लिए मनमानी कीमत नहीं वसूल सकेंगे। सरकार ने निजी अस्पतालों में लगाई जाने वाली वैक्सीन की कीमत तय कर दी है।
कोविशील्ड वैक्सीन की एक डोज के लिए अस्पताल अधिकतम 780 रुपये वसूल कर सकते हैं। यह वैक्सीन भारत में सीरम इंस्टीट्यूट द्वारा निर्मित है।
भारत में विकसित कोवाक्सिन की एक डोज के लिए निजी अस्पताल अधिकतम 1410 रुपये ले सकते हैं। यह स्वदेशी वैक्सीन भारत सरकार और सरकारी संस्थान ICMR की मदद से निजी कंपनी भारत बायोटेक बना रही है।
रूस की स्पुतनिक वी वैक्सीन की एक डोज़ के लिए निजी अस्पतालों को अधिकतम 1145 रुपये वसूलने की सरकार ने छूट दी है। यह वैक्सीन अभी रूस से आयात की गई है, लेकिन जल्द ही भारत में बनी स्पुतनिक V भी उपलब्ध होने की उम्मीद है।
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निजी अस्पतालों के लिए तय की गई अधिकतम कीमतों में टीके की लागत के अलावा 150 रुपये का सर्विस चार्ज भी शामिल है।
इसके अलावा जो लोग वैक्सीन लगवाने के लिए कोविन (CoWIN) पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन नहीं कर पाए हैं या करने में असमर्थ हैं, वे सरकारी या निजी अस्पतालों के टीकाकरण केंद्रों पर जाकर भी रजिस्ट्रेशन कराकर टीका ले सकते हैं।
केंद्र सरकार राज्यों को वैक्सीन की सप्लाई उनकी आबादी, कोरोना इंफेक्शन के फैलाव की स्थिति, टीकाकरण कार्यक्रम की प्रोग्रेस और टीके की बर्बादी जैसी बातों को ध्यान में रखते हुए की जाएगी।
स्वास्थ्य कर्मियों, फ्रंटलाइन वर्कर्स समेत 45 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को दूसरी डोज की वैक्सीन लगवाने के लिए सरकार प्राथमिकता देगी।