एक बात और ध्यान देने लायक है कि प्रदूज्ञ्षण के आंकड़े पूरी तरह उपलब्ध नहीं हैं। करीब 2 हजार तरीके के मामले सूक्ष्म प्रदूषण के हैं। कम्बस्टन प्रदूषण का सबसे बड़ा और खतरनाक स्रोत है। पूरे गंगा रिवर बेसिन में कार्बन के काले कण लोगों कसेहत को प्रभावित कर रहे हैं। इसका नियंत्रण बेहद जरूरी है। केंद्र सरकार की ओर से एलपीजी मुहैया कराया जाना एक बेहद अहम और कारगर कदम है। पॉवर प्लांट को भी उत्सर्जन मानकों के अनुकूल करना होगा।
परमाणु ऊर्जा आयोग के पूर्व चैयरमैन अनिल काकोदकर ने कहा कि अगले 10 वर्षों में चीन के पास परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में हमसे बड़ी परियोजना है लेकिन मेरा विश्वास है कि भारत के लिए यह एक बड़ा अवसर है। यदि पहल ककी जाए तो हम चीन को पछाड़ सकते हैं। हमने सौर ऊर्जा के लिए देर से कदम बढ़ाया यह नुकसानदायक रहा। देश में ऊर्जा की जरूरत को बिना परमाणु ऊर्जा के पूरा नहीं किया जा सकता। सोलर से पैदा होने वाले ऊर्जा का भंडारण करना एक बड़ी चुनौती है।
वहीं भंडारण के साथ सौर ऊर्जा की लागत परमाणु ऊर्जा से ज्यादा है। परमाणु ऊर्जा प्लांट के लिए अभी सबसे बड़ी समस्या यूरेनियम का पर्याप्त मात्रा में न होना है। थोरियम को लेकर काम हो रहा है। भारत में परमाणु ऊर्जा निगम लिमिटेड वैश्विक स्तर पर बेहतरीन प्रदर्शन कर रहा है। हम जरूरत है कि भारत की परमाणु ऊर्जा को वैश्विक परमाणु आपूर्ति देशों के साथ एकीकृत किया जाय।
सॉफ्टबैंक के चैयरमैन मनोज कोतहली ने कहा कि सरकार की मौजूदा नीतियां बड़े बदलाव ला रहीं हैं नवीकरणीय ऊर्जा पर अगले चार वर्ष में उत्पादन 20 से 100 गीगावाट होगा। मौजूदा समय में 88 गीगावाट ऊर्जा जनरेटर से पैदा होती है। 3 से 4 वर्षों में इनकी जरूरत खत्म हो जाएगी। सौर ऊर्जा को भंडारित करने और ग्रिड व वितरण में सुधार करके लक्ष्य हासिल किए जा सकेंगे। सौर ऊर्जा के लिए सबसे बड़ी दरकार जमीन के बेकार टुकड़े की है। 100 गीगावाट सौर ऊर्जा की सफलता के लिए इस तरह कि करीब 6.5 लाख वर्ग मीटर वेस्ट लैंड की जरूरत होगी।
वहीं दूसरी सबसे बड़ी चीज सूरज की रोशनी है। अकेले लद्दाख 50 गीगावाट सौर ऊर्जा पैदा करने की क्षमता रखता है। सौर ऊर्जा का भण्डारण भी अगले 4 वर्ष में बेहतर हो जाएगा। सरकार को 99 फीसदी प्री-पेड मोबाइल की तरह बिजली के प्री-पेड किये जाने की सलाह भी दी गयी ह।ै। इन कुछ कदमों की वजह से हम जीवाश्म ईंधन से बिल्कुल मुक्त हो सकते हैं। यदि इस क्षेत्र में अवसर की बात की जाय तो मेक इन इंडिया इसमे बेहद सहायक और पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत 200 से 300 अरब रुपये का निवेश हो सकता है।
सीपीसीबी के निदेशक जेएस कौम्यूत्र ने कहा कि दिल्ली का प्रदूषण पूरी तरह मौसमी कारणों पर निर्भर करता है। वहीं पंजाब, हरियाणा, राजस्थान से पराली जलाये जाने के कारण भी दिल्ली की हवा खराब होती है। ऐसे में पराली जलाये जाने पर रोक लगाने से लेकर दिल्ली के भीतर होने वाले स्थानीय प्रदूषण को कम करने को लेकर कदम उठाए जा रहे हैं । इसके प्रभाव भी दिखाई दे रहे। हालांकि 90 लाख वाहनों में सबसे ज्यादा संख्या दो पहिया वाहनों की है। इनके बढ़ने का मतलब है कि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था कमजोर और मंहगी है। इसे सबसे पहले सुधारने की जरूरत है।
अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट के साझीदार निपुण साहनी ने बताया कि सिर्फ पूंजी की बदौलत प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की समस्या से नहीं निपटा जा सकता। न ही हर समस्या में अवसर ढूंढना बेहतर है। हमें नवोन्मेष पर ध्यान देना चाहिए। इंडस्ट्री पर इंडस्ट्री बनाना ठीक नहीं है। जितनी पूंजी स्वस्थ ऊर्जा तकनीक में आई है उतनी आबो-हवा में नहीं है। इंफो एज के संस्थापक और उद्यमी संजीव बिकचंदानी ने कहा कि साफ हवा और पानी के लिए सूक्ष्म स्तर पर काम हो रहा है। लेकिन चुनौती यह है इसे आप किस तरह स्वीकार करेंगे और यह भी देखेंगे कि कहाँ अवसर है।