नोटबंदी के बाद बाजार में तरह-तरह की अफवाहों का दौर है। कुछ दिनों पहले 2000 रुपये के नए नोटों में जीपीएस चिप होने की अफवाह उड़ी थी। उसके बाद एप स्टोरों पर कई नकली मोबाइल करेंसी स्कैनर सामने आ गए जो नए नोटों को स्कैन कर उसके असली होने का पता लगाने का दावा कर रहे थे।
इन दिनों एक और अफवाह बाजार में फैली हुई है। इंटरनेट और व्हाट्स अप मैसेजों में कहा गया है कि 500 और 2000 के नए नोटों में रेडियोएक्टिव स्याही है। सरकार ने अभी तक इसका खंडन नहीं किया है लेकिन कॉमन सेंस का इस्तेमाल करते ही समझ आ जाएगा कि यह अफवाह है। कुछ अखबारों, चैनलों और न्यूज साइट्स के मुताबिक व्हाट्सअप मैसेजों में दावा किया गया है नए नोटों में फॉस्फोरस (पी32) के रेडियो एक्टिव आइसोटोप हैं, जिसमें 15 प्रोटोन और 17 न्यूट्रॉन होते हैं।
प्रिटिंग के वक्त ही रेडियोएक्टिव स्याही का इस्तेमाल बड़ी तादाद में किसी जगह पर बड़ी तादाद में छिपाए गए नोटों का पता लगाने के लिए कि या जा रहा है। दिल्ली, चेन्नई, वेल्लोर, बंगलूरू और पुणे में आयकर विभाग की ओर से नोट जब्त करने के लिए मारे गए छापों से इस अफवाह को बल मिलता जा रहा है।
इन अफवाहों के मुताबिक नोटों में मौजूद यह स्याही लोगों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं है। लेकिन जब नोट एक जगह बड़ी मात्रा में जमा हो जाते हैं तो इनके संकेत इनकम टैक्स डिपार्टमेंट तक पहुंच जाते हैं। बैंकों और वित्तीय संस्थानों के अलावा जहां पर भी ऐसी रकम जमा होने का पता चल रहा है वहां इनकम टैक्स विभाग कार्रवाई कर रहा है।
पिछले महीने ही बैंकोेें में नए नोटों के गोरखधंधे की खबर पर दो बैंकों पर छापे मारे थे। सूत्रों का कहना है कि जाहिर है इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को बैंकों के इस गोरखधंधे के बारे में अपने इंटेलिजेंस से सूचना मिली होगी न कि रेडियोएक्टिव स्याही से।