महाराष्ट्र की औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) को अब नई सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) नीति के तहत चलाया जाएगा। इस नीति का उद्देश्य इन संस्थानों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की आधुनिक प्रशिक्षण इकाइयों में बदलना है, ताकि उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप कुशल मानव संसाधन तैयार किया जा सके।
महाराष्ट्र की औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) को नई पीपीपी नीति के तहत संचालित किया जाएगा और यह वैश्विक स्तर की प्रशिक्षण संस्थाओं में रूपांतरित कर उद्योगों की आवश्यकता के अनुसार अत्याधुनिक प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार किया जा सकेगा। राज्य के कौशल, रोजगार और नवाचार विभाग द्वारा तैयार की गई सार्वजनिक-निजी भागीदारी अर्थात पीपीपी नीति को राज्य मंत्रिमंडल की हरी झंडी मिल गई है।
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नई पीपीपी नीति के माध्यम से अत्याधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण, संस्थाओं की बुनियादी सुविधाएं, वैश्विक स्तर की कंपनियों में सीधा अप्रेंटिसशिप प्रशिक्षण और कंपनियों की भागीदारी के कारण प्रशिक्षणार्थियों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने वाले रोजगार के वैश्विक अवसर उपलब्ध होंगे। कौशल विकास मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने कहा कि इसके अंतर्गत समयानुकूल, नवाचारी पाठ्यक्रम पढ़ाए जाएंगे और 2 लाख आईटीआई विद्यार्थियों को इसका लाभ होगा। अपर मुख्य सचिव श्रीमती मनीषा वर्मा ने मंत्री लोढ़ा ने कहा कि शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) राज्य की व्यावसायिक शिक्षा प्रणाली का अभिन्न भाग रही हैं। इन संस्थाओं को अब वास्तव में वैश्विक औद्योगिक प्रशिक्षण केंद्र बनाकर महाराष्ट्र में कुशल मानव संसाधन तैयार करने हेतु सार्वजनिक-निजी भागीदारी अर्थात पीपीपी नीति की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के औद्योगिक विकास में आईटीआई ने कुशल मानव संसाधन प्रदान करके अब तक बड़ा योगदान दिया है। परंतु अब वैश्विक उद्योगों की आवश्यकतानुसार अत्याधुनिक प्रशिक्षित उम्मीदवारों की अत्यधिक आवश्यकता महसूस हो रही है। अनेक संस्थाओं की आधारभूत सुविधाओं की समस्या है। साथ ही कुछ पाठ्यक्रमों में त्रुटियां हैं। इसके अलावा इन संस्थाओं को आर्थिक सीमाएं जैसे अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इन संस्थाओं को पुनर्जीवित करके भविष्य की आवश्यकताओं को पहचानकर कुशल मानव संसाधन तैयार करना आवश्यक है।
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ऐसी होगी आईटीआई की पीपीपी नीति
अग्रणी कॉर्पोरेट्स, औद्योगिक संगठन को पाठ्यक्रम विकसित करने और अत्याधुनिक वैश्विक प्रशिक्षण सुविधाएं प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित देने के साथ हीकिया जाएगा। साथ ही, सीएसआर के माध्यम से शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में सहभाग बढ़ाया जाएगा। पीपीपी नीति से विद्यार्थियों को वैश्विक औद्योगिक प्रशिक्षण जैसे एआई, साइबर सुरक्षा, ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग, आईओटी एवं रोबोटिक्स और हरित ऊर्जा जैसे वैश्विक तकनीकी का प्रशिक्षण प्राप्त किया जा सकेगा। विशेष भौगोलिक क्षेत्र में प्रभावी उद्योग समूहों का समावेश होने से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की संकल्पना लागू की जाएगी। पुणे और छत्रपती संभाजी नगर में ऑटोमोबाइल कंपनियां अधिक होने से वहां सेंटर ऑफ एक्सीलेंस सेंटर विकसित किए जा सकेंगे, जिससे वहां के प्रशिक्षणार्थियों को रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। प्रशिक्षणार्थियों को स्टार्टअप हेतु मार्गदर्शन, कार्यक्षेत्र और निधि सहायता प्रदान करने वाले कैंपस और विविध रोजगार मेलों का आयोजन जिसमें कंपनियों की सीधी सहभागिता होगी। महिलाओं की सहभागिता बढ़ाने पर बल, कंपनियों द्वारा महिलाओं हेतु नवाचारी उपक्रम चलाए जाएंगे। प्रशिक्षणार्थियों के लिए रोजगार के अवसर के सृजन के लिए पीपीपी के तहत पर चल रही औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था में ही जॉब प्लेसमेंट सेल स्थापित किया जाएगा। वहीं, आईटीआई भले ही पीपीपी मॉडल पर संचालित होंगे लेकिन इस पर सरकार का पूर्ण नियंत्रण होगा।