राज्यों उठ रहे असंतोष की आवाज के बीच केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के सुर में भी नरमी देखने को मिल रही है। उन्होंने कहा कि लोगों की जिंदगी बचाना अकेले केंद्र की जिम्मेदारी नहीं है। मुख्यमंत्री चाहें तो अपने राज्यों में जुर्माने की राशि को घटा सकते हैं लेकिन उन्हें इसके नतीजों की भी जिम्मेदारी लेनी होगी।
गड़करी ने कहा कि भारी जुर्माने का मकसद लोगों की जिंदगी बचाना है। जुर्माना लोगों की जान से ज्यादा कीमती नहीं है। सरकार ने सबसे सलाह और संसद में चर्चा करके इस कानून को लागू किया था। हादसों को कम करने की जिम्मेदारी राज्य और केंद्र दोनों की है।
ये 11 राज्य हैं खिलाफ
- गुजरात
- उत्तराखंड
- राजस्थान
- मध्यप्रदेश
- छत्तीसगढ़
- गोवा
- दिल्ली
- ओडिशा
- पश्चिम बंगाल
- कर्नाटक
- महाराष्ट्र
कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री गोविंद करजोल ने कहा कि अच्छी सड़कें होने के कारण बड़ी दुर्घटनाएं होती हैं, जहां लोग 120 से 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से वाहन चलाते हैं। अधिकांश दुर्घटनाएं राजमार्गों पर होती हैं। मैं उच्च जुर्माना लगाने का समर्थन नहीं करता। हम कैबिनेट मीटिंग के दौरान जुर्माने में संशोधन पर फैसला लेंगे।
मध्यप्रदेश के परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने केंद्र सरकार के मोटर वाहन अधिनियम को तुगलकी आदेश बताया। उन्होंने कहा कि जुर्माने की राशि आम आदमी जितना खर्च कर सकता है, उससे अधिक है। मैं मुख्यमंत्री के साथ इस विषय पर चर्चा करूंगा और जहां आवश्यकता होगी, वहां बोझ को कम करने का प्रयास करूंगा।