पश्चिम बंगाल विधानसभा ने गुरुवार को नया लोकायुक्त विधेयक पारित किया। इस विधेयक में राज्य के मुख्यमंत्री को लोकायुक्त के प्रभाव से बाहर रखा गया है। साथ-साथ विधेयक में यह भी कहा है कि राज्य सरकार के अधीन कार्यरत अधिकारियों पर राज्य सरकार की मंजूरी के बिना लोकायुक्त कारवाई नहीं कर सकता।
यह विधेयक राज्य में लोकायुक्त विधेयक 2003 का स्थान लेगा। जिसे पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य की सरकार ने लाया था। पुराने विधेयक में लोकायुक्त के पास मुख्यमंत्री के खिलाफ कारवाई करने के अधिकार था, जिसे खत्म कर दिया गया है।
पश्चिम बंगाल लोकायुक्त विधेयक 2018 की धारा 8(A) में संशोधन किया गया है, जिसमें यह उल्लेख है कि मुख्यमंत्री का पद लोकायुक्त के दायरे में नहीं रहेगा और राज्य सरकार के अधिकारियों पर कारवाई करने से पूर्व सरकार से अनुमति लेनी होगी। नया नियम लोकपाल और लोकायुक्त विधेयक 2013 की धारा 14(1) के अनुसार है। जिसमें प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे से मुक्त रखा गया है।
पश्चिम बंगाल में पारित नए लोकायुक्त विधेयक के अनुसार लोकायुक्त का चुनाव मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष, विधानसभा स्पीकर तथा राज्य संसदीय कार्य मंत्री के सुझाव के आधार पर होगा। बता दें कि राज्य सरकार के इस विधेयक पर सुप्रीम कोर्ट पहले ही अपनी नाराजगी जाहिर कर चुका है।
विपक्ष भी ममता सरकार के द्वारा पारित नए लोकायुक्त विधेयक का लगातार विरोध कर रहा है।